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Kathua News: प्रदेश में देसी गायों की नस्ल को बेहतर करेंगे यूएसए से लाए सांड

Thu, 22 Jan 2026 02:15 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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- एचएफ और जर्सी नस्ल के 40 सांड किए जा रहे आयात
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- बेंगलुरू में क्वारंटीन सेंटर से आयात किए गए 35 सांड अगले सप्ताह जम्मू कश्मीर पहुंचेंगे

साहिल खजूरिया
कठुआ। जम्मू कश्मीर में अमेरिका से उच्च गुणवत्ता वाले होल्स्टीन फ्रिजियन (एचएफ) और जर्सी नस्ल के कुल 40 सांड आयात किए जा रहे हैं। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और देसी गायों की नस्ल को उन्नत बनाने के लिए एचएडीपी के तहत सांड लगभग दस करोड़ की लागत से आयात किए जा रहे हैं।
इसे प्रदेश में पशुपालन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने और किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में प्रयास से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्तमान में स्थानीय नस्ल की गाय जो दस से 15 लीटर तक दूध देती है वो क्रॉस ब्रीडिंग के बाद 40 से 50 लीटर तक दूध देने की
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क्षमता रखेगी। पहले अमेरिका में और अब कर्नाटक में एक महीने से ये सांड क्वारंटीन हैं। क्वारंटीन करने से पहले यह सुिनश्चित किया जाएगा की सभी सांड निरोग हैं और उन्हें सभी जरूरी टीके भी लगा दिए गए हैं। बेंगलुरू स्थित क्वारंटीन सेंटर से पहली लॉट के 35 सांड अगले सप्ताह जम्मू-कश्मीर पहुंचेंगे। इनमें से 18 सांड कश्मीर संभाग और 17 सांड जम्मू संभाग को उपलब्ध कराए जाएंगे। अब तक आयात किए गए सांडों में 22 एचएफ और 13 जर्सी नस्ल के हैं, जबकि शेष पांच सांड मार्च तक भारत पहुंचने की उम्मीद है। इस योजना के तहत प्रत्येक शुद्ध नस्ल के सांड से कम से कम तीन लाख सीमन डोज निकालने का प्रावधान है। इन डोज का उपयोग प्रदेश की देसी गायों की नस्ल सुधारने और उनकी दूध उत्पादन क्षमता को बढ़ाने में किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदेश में दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद मिलेगी। आयात किए गए ये सांड कश्मीर संभाग में गांदरबल जिले के फ्रोजन सीमन प्रॉजेक्ट रणबीरबाग और जम्मू संभाग के जम्मू जिले के फ्रोजन सीमन प्रॉजेक्ट हक्कल में रखे जाएंगे।
एचएडीपी के तहत लगभग 25 लाख से खरीदा गया एक सांड


अमेरिका से सांडों का आयात समग्र कृषि विकास कार्यक्रम (एचएडीपी) के तहत किया जा रहा है। आयात किए गए सांडों की कीमत लगभग 25 लाख रुपये प्रति सांड है और इनकी आयु पांच से बारह महीने के बीच है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इन्हें ट्रेन के माध्यम से जम्मू-कश्मीर लाने पर भी विचार चल रहा है, ताकि परिवहन प्रक्रिया सुरक्षित और सुगम हो सके।

पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार इस पहल से न केवल दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि पशुपालन क्षेत्र में नई तकनीक और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली का भी समावेश होगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और किसानों को बेहतर आजीविका के अवसर प्राप्त होंगे।
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कोट

यह कदम प्रदेश में कृषि और पशुपालन क्षेत्र को नई दिशा देने वाला साबित हो होगा। उच्च गुणवत्ता वाले सांडों से तैयार सीमन डोज आने वाले वर्षों में दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाएंगे। कश्मीर और जम्मू दोनों संभाग के लिए एचएफ और जर्सी नस्ल के 20..20 सांड आयात किए गए हैं जो अगले सप्ताह तक जम्मू कश्मीर पहुंच जाएंगे।
- डॉ. युनूस शेख, पशुपालन निदेशक, कश्मीर
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