-महानिदेशक जेल और प्रधान सचिव गृह विभाग ने किया निरीक्षण
कठुआ। प्रदेश की पहली हाई सिक्योरिटी जेल का काम इसी साल पूरा कर लिया जाएगा। कायदे से काम को मार्च 2025 में पूरा किया जाना था लेकिन फंड के अभाव में यह परियोजना अब इस साल पूरा किए जाने की योजना है।
शनिवार को महानपुर से सटे डांबरा गांव में निर्माणाधीन हाई-सिक्योरिटी जेल का महानिदेशक पुलिस (जेल), जम्मू-कश्मीर दीपक कुमार, प्रधान सचिव, गृह विभाग, जम्मू-कश्मीर चंद्राकर भारती, विशेष डीजी कोऑर्डिनेशन पीएचक्यू (अतिरिक्त प्रभार एमडी जे एंड के पीएचसी) एसजेएम गिलानी, सीआरपीएफ के उच्च अधिकारियों के अलावा डीसी और एसएसपी कठुआ ने दौरा किया। अधिकारियों ने जेल परिसर का निरीक्षण किया और निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने सुरक्षा मानकों, भवन संरचना और सुविधाओं का जायजा लिया। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए ताकि इस हाई-सिक्योरिटी जेल को जल्द से जल्द तैयार किया जा सके।
दअरसल, कठुआ जिले की महानपुर तहसील के डांबरा गांव में अभेद सुरक्षा वाली इस जेल का निर्माण जारी है। 87.81 करोड़ की राशि से तैयार हो रही इस जेल के लिए प्रशासनिक परिषद की मंजूरी के बाद पद सृजित कर दिए गए हैं। उधर, जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों से 240 खूंखार कैदियों काे इस जेल में रखने की व्यवस्था होगी। जेल का निर्माण पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के माध्यम से किया जा रहा है। प्रदेश की अन्य जेलों में विचाराधीन और सजायाफ्ता कैदियों की भीड़ को कम करने के लिए यह जेल विशेष रूप से तैयार की जा रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस जेल में केवल खूंखार कैदियों को ही रखे जाने का प्रावधान है। चूंकि अन्य जेलों में यह कैदी, छोटे अपराध कर आए कैदियों और विचाराधीनों के संपर्क में आ जाते हैं। लिहाजा केंद्र सरकार का अपराध को आगे बढ़ने से रोकने के लिए भी बड़ा कदम है।
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2023 में गृहमंत्री ने किया था निर्माण स्थल का दौरा
वर्ष 2023 की शुरुआत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस हाई सिक्योरिटी जेल के निर्माण स्थल का दौरा किया था। ऐसे में इसे गृहमंत्रालय की एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में भी देखा जा रहा है। बता दें कि मौजूदा समय में जम्मू संभाग में ऐसी 14 जेलें हैं जिनमें दो केंद्रीय और 10 जिला कारावास हैं। इनमें एक विशेष जेल भी है। इन जेलों में 3629 कैदियों को रखे जाने की क्षमता है लेकिन प्रदेश प्रशासन इनमें 5300 और कैदियों को रखने की दिशा में काम कर रहा है।
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जेल के लिए 342 पद हैं सृजित
प्रशासनिक परिषद की मंजूरी के बाद प्रदेश की पहली हाई सिक्योरिटी जेल के लिए 342 पदों का सृजन किया गया है। इसमें एसएसपी जेल, बी ग्रेड फिजिशियन विशेषज्ञ, सहायक सर्जन, डेंटल सर्जन, जेल अधीक्षक, जेल उपाधीक्षक के एक एक और जेल सहायक अधीक्षक के तीन पद भी शामिल हैं। इसके अलावा हेड वार्डर के 48 और वार्डर के 243 पद भी सृजित किए गए हैं।
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