दिलीप अंदोत्रा अस्पताल में पहुंचे पर्ची दिखाते हुए संवाद
कठुआ। जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान जीएमसी में मरीजों को दवा उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। अस्पताल की डिस्पेंसरी और जनऔषधि केंद्र शोपीस बनकर रह गए हैं। इसके चलते मरीजों को मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोरों से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
शुक्रवार को जीएमसी कठुआ की पड़ताल में सामने आया कि प्रतिदिन यहां 16 अलग-अलग ओपीडी में 1000 से 1200 मरीज इलाज के लिए पंजीकरण करवाते हैं। मगर अस्पताल की डिस्पेंसरी से केवल 150 मरीजों को ही दवा मिल पा रही है। स्थिति यह है कि डॉक्टर के पर्चे पर लिखी गई पांच दवाओं में से एक या दो ही उपलब्ध होती हैं। शेष दवाइयां मरीजों को बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। इस कारण अस्पताल की डिस्पेंसरी में सन्नाटा रहता है जबकि निजी मेडिकल स्टोरों पर मरीजों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं।
मरीजों का कहना है कि जीएमसी कठुआ में सेवाएं देने वाले कई डॉक्टरों के क्लीनिक शहर के मेडिकल स्टोरों से जुड़े हुए हैं। मेडिकल स्टोर संचालकों की ओर से इन डॉक्टरों को स्थान उपलब्ध करवाया गया है और स्टोरों पर लगे बोर्ड इसकी गवाही देते हैं। यही कारण है कि डॉक्टरों की ओर से लिखी गई दवाइयां आसानी से इन्हीं मेडिकल स्टोरों पर मिलती हैं। मजबूरी में मरीजों को इन्हीं स्टोरों का रुख करना पड़ता है क्योंकि पर्चे पर सीधे दवा का नाम लिखा जाता है। इस बारे में लोगों का कहना है कि यह स्थिति अव्यवस्था की पराकाष्ठा है। जिला के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में दवा का टोटा होना गंभीर चिंता का विषय है। यहां अधिकांश मरीज चुप रहना पसंद करते हैं क्योंकि उन्हें आगे भी इसी अस्पताल में इलाज करवाना है। वहीं कुछ मरीजों ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया। फिलहाल जीएमसी कठुआ में दवा वितरण की इस बदहाली ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
निशुल्क दवा उपलब्ध कराने वाली डिस्पेंसरी और जन औषधि केंद्र का शो-पीस बन जाना आम जनता के लिए बड़ी समस्या है। यदि स्थिति में सुधार नहीं किया गया तो गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए इलाज कराना और भी कठिन हो जाएगा।