कठुआ। प्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब के स्टेशन कठुआ में रोजाना तीन हजार यात्री आते-जाते हैं। मगर अफसोस कि उन्हें इंतजार के दौरान सिर पर छत तक नसीब नहीं होती। प्लेटफार्म नंबर दो पर बने छोटे-छोटे शेड बारिश और धूप में किसी काम नहीं आते।
बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पहले रेलवे स्टेशन होने का गौरव रखने वाला कठुआ का रेलवे स्टेशन समय के साथ यहां होने वाले विकास के मामले में पिछड़ता जा रहा है। वित्तीय वर्ष के दौरान इस स्टेशन के विकास के नाम पर यहां मौजूद दो प्लेटफार्म के नए फर्श का निर्माण व प्लेटफार्म नंबर एक पर मौजूद शौचालय को बेहतर बनाया गया है।
बरसात के दिनों में यात्रियों को फुटब्रिज के नीचे शरण लेनी पड़ती है जबकि सर्दी और कोहरे में देर रात तक चलने वाली ट्रेनों का इंतजार खुले प्लेटफार्म पर करना पड़ता है। महिला यात्रियों के लिए शौचालय तक की व्यवस्था नहीं है। बता दें कि कठुआ को पहला रेलवे स्टेशन 1962 में मिला था जब यहां तक ट्रैक पहुंचा। मगर छह दशक बीतने के बाद भी यह स्टेशन यात्रियों की मूलभूत सुविधाओं से पिछड़ा हुआ है। संवाद