सुबह कचरे उठाने की जगह लगा दी जाती है आग
कठुआ। शहर की सवा लाख आबादी को ठोस कचरा प्रबंधन की सुविधा मिलने का सपना आज भी अधूरा है। नगर परिषद का मैटेरियल फैसिलिटी सेंटर वर्षों से तैयार होने के बावजूद सुचारु रूप से संचालित नहीं हो पाया है। नतीजतन शहर से रोजाना निकलने वाले लगभग 40 टन कचरे का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से होने के बजाय खुले में जलाकर किया जा रहा है। इससे रावी नदी का प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।
हर रोज शहर से निकलने वाला कचरा रावी दरिया के किनारे ही फेंका जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत कठुआ के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना को मंजूरी दी थी और इसके लिए डेढ़ करोड़ की राशि स्वीकृत की गई थी। लंबे इंतजार के बाद बेडिया पत्तन इलाके में गौशाला के पास 65 लाख रुपये की लागत से साइट तैयार की गई। योजना थी कि डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण के माध्यम से इस सेंटर को संचालित किया जाए लेकिन एजेंसी के काम छोड़ने के बाद नगर परिषद ने आउटसोर्स कर्मचारियों के माध्यम से इसे चलाना शुरू कर दिया।
कर्मचारियों की तैनाती के बाद सेंटर पर आने वाले कचरे का पृथक्करण शुरू करवाया गया और इससे एक खेप कंपोस्ट भी तैयार की गई। नगर परिषद की योजना थी कि इस कंपोस्ट को लोगों को बेचा जाए लेकिन आज तक यह बिक्री नहीं हो पाई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सेंटर में रोजाना कचरा तो डाला जाता है लेकिन इसके साथ ही वहां से धुंआ उठना आम बात है। इससे साफ है कि आज भी कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करने के बजाय उसे जलाया जा रहा है जो प्रदूषण का बड़ा कारण बन रहा है।
खुले में फेंका जा रहा कचरा
आंकड़ों के अनुसार हर साल 15 हजार टन से अधिक कचरा खुले में फेंका जा रहा है। इसी लापरवाही के चलते जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति ने नगर परिषद पर करीब चार वर्ष पहले ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों की अनदेखी के लिए 82.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
मैटेरियल फैसेलिटी सेंटर बनने के बाद पुराने कचरे को एश कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया जरूर शुरू की गई है और एनजीटी के निर्देशों के तहत दरिया किनारे पौधरोपण की योजना भी है। लेकिन जब तक यह सेंटर पूरी तरह सुचारू नहीं होता, तब तक शहर का ठोस कचरा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित होना संभव नहीं है। इस अधूरी परियोजना ने कठुआ शहर को प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट की ओर धकेल दिया है।