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Kathua News: नगरोटा में कृषि भूमि पर सीमेंट फैक्ट्री का विरोध, लोगों ने किया प्रदर्शन

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कठुआ। देश के प्रमुख औद्योगिक घराने द्वारा नगरोटा और मेरथ में प्रस्तावित मेगा सीमेंट इकाई की स्थापना को लेकर स्थानीय किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों में गहरा रोष है। क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने इस औद्योगिक परियोजना के खिलाफ डीसी कार्यालय परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। डीसी राजेश शर्मा को मांगों का ज्ञापन सौंपते हुए उनकी कृषि भूमि को बचाने की मांग की।
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प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गत 28 जुलाई को बरनोटी में पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए एक सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की गई, जिसमें वास्तविक किसानों और भूमि मालिकों को शामिल नहीं किया गया। बैठक में कुछ पूर्व सरपंचों और चुनिंदा व्यक्तियों को आमंत्रित किया गया, जबकि प्रभावित गांवों के निवासी इस आयोजन से पूरी तरह अनभिज्ञ रहे।
प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि नगरोटा गांव की भूमि अत्यंत उपजाऊ है, जो वर्षों से उज्ज् नाला और 1985 से रावी नहर से सिंचित होती रही है। यह भूमि न केवल खाद्य सुरक्षा में योगदान देती है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका का मुख्य स्रोत भी है। किसानों का कहना है कि इस भूमि पर औद्योगिक इकाई स्थापित करना उनके पुश्तैनी पेशे और आर्थिक स्थिरता को खतरे में डाल देगा।
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पंचायत प्रतिनिधियों ने मांग की कि औद्योगिक इकाइयों की स्थापना पहले से अधिग्रहित भूमि पर की जाए, जिससे कृषि भूमि और पर्यावरण दोनों की रक्षा हो सके। उन्होंने चेताया कि रेड कैटेगरी की औद्योगिक इकाइयों से क्षेत्र में जल और वायु प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे न केवल खेती प्रभावित होगी बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
इस मौके पर पूर्व सरपंच घाटी पृथीपाल सिंह निक्कू ने रोष का इजहार करते हुए कहा कि पहले ही घाटी, पल्ली, गोविंदसर, महरोली और भागभली में रावी दरिया के किनारे हजारों कनाल भूमि औद्योगिक उपयोग के लिए ली गई है। जहां आज भी पचास प्रतिशत भूमि पर या तो इकाइयों की स्थापना नहीं हुई है या फिर बंद पड़ी हुई हैं। अगर सरकार को नई औद्योगिक इकाइयों के लिए जगह चाहिए तो वहां ही ऐसी इकाइयों को स्थापित किया जाना चाहिए, न कि और किसानों को बर्बाद किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि घाटी औद्योगिक क्षेत्र में खाली पड़ी हजारों कनाल भूमि पर कोई ऐसा काम नहीं हो रहा कि उससे हमारा देश और समाज तरक्की करें, बल्कि उक्त भूमि नशीले पदार्थ के कारोबारियों का अड्डा बन चुका है। जो समाज को नुकसान पहुंचा रहा है।
वहीं, पूर्व सरपंच सहार भोली सिंह जसरोटिया ने जिला प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें और नगरोटा व मेरथा गांवों की कृषि भूमि को औद्योगिक उपयोग में बदलने की प्रक्रिया को तत्काल रोकें। उन्होंने वैकल्पिक स्थलों की तलाश करने की मांग की, जहां औद्योगिक विकास से पर्यावरण और आजीविका पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
प्रदर्शन में बरवाल के पूर्व सरपंच पुरुषोत्तम सिंह, पूर्व नायब सरपंच सतपाल चौधरी, विकास उपाध्याय, लंबरदार राजेश सिंह, रविंद्र सिंह, अमरीश जसरोटिया के अलावा स्थानीय किसान परिवार शामिल हुए। उन्होंने मांग न पूरी होने पर व्यापक जनआंदोलन शुरू किए जाने की चेतावनी दी है।
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