कथावाचक राम दास अनुरागी ने सुनाया गोकर्ण और धुंधकारी की कथा का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बसोहली उपमंडल के गांव धार झेंखर में शुक्रवार को श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आगाज हो गया है। कथा के पहले दिन कथावाचक राम दास अनुरागी ने गोकर्ण और धुंधकारी की कथा का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने बताया कि तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव और उनकी पत्नी धुंधुली रहती थी। धुंधुली झगड़ालू किस्म की थीं। संतान नहीं होने के कारण उन्होंने अपनी पीड़ा एक ऋषि को बताई। ऋषि ने एक फल देकर पत्नी को खिलाने के लिए कहा। पत्नी ने फल गाय को खिला दिया। धुंधुली ने अपनी बहन के बच्चे को ले लिया। आत्मदेव ने बच्चे का नाम धुंधकारी रखा। इसके बाद गाय ने एक बच्चे को जन्म दिया जो मनुष्य के रूप में था पर उसके कान गाय के समान थे। उसका नाम गोकर्ण रख दिया। बड़ा होने पर धुंधकारी नशेड़ी, चोर निकला और एक दिन उसने अपनी मां को मार डाला। पिता व्यथित होकर वन चले गए। धुंधकारी वेश्यागमन करने लगा। एक दिन वेश्याओं ने धुंधकारी को मार डाला। मरने पर धुंधकारी प्रेत बन गया। गोकर्ण त्रिकाल संध्या करते थे। उन्होंने भागवत कथा सुनाकर धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्त कराया।