कठुआ। शहर के वार्ड 19 में जारी श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी के विवाह की झांकी निकाली गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर खुशी का इजहार किया। कथाव्यास आदियोगी गौतम महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं हमें यह सिखाती हैं कि जीवन में सरलता, निष्कपटता और आनंद ही वास्तविक सुख का आधार हैं।
कथाव्यास ने कहा कि मनुष्य के दुख का कारण उसके भीतर उठते अशुभ विचार हैं। इन दोषों से बचने का उपाय यही है कि जब क्रोध आए तो मुस्कराएं, जब चिंता सताए तो चिंतन करें, जब बुरा विचार आए तो प्रभु नाम का स्मरण करें और जब क्लेश की स्थिति बने तो भूतकाल की किसी सुखद घटना को याद करें।
शास्त्री जी ने कहा कि यदि दुखों से बचना चाहते हो तो मन को दूषित न होने दें, वाणी को संयमित रखें और सदा अच्छा आचरण करें। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं इसी सत्य की ओर संकेत करती हैं कि निष्कपट मन और निर्मल आचरण से ही जीवन में आनंद और शांति प्राप्त होती है।