जंगलोट के कनियाड़ी में बाढ़ के बाद भी हालात न सुधरने पर ग्रामीणों में रोष संवाद
ग्रामीण बोले-आश्वासन के दावे निकले खोखले
कठुआ। जंगलोट के कनियाड़ी गांव में आठ माह पहले आई बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने पर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं ने दौरा कर राहत व बचाव कार्य शुरू करने का आश्वासन दिया था लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अगस्त माह में बागड़ा क्षेत्र में बादल फटने के बाद गांव में पानी का तेज बहाव आया था। इस दौरान कई घरों में मलबा भर गया और रविदास मंदिर के पास बनी सुरक्षा दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। ग्रामीणों ने जैसे-तैसे घरों से मलबा निकालकर उन्हें रहने योग्य बना लिया लेकिन कटाव रोकने और बुनियादी ढांचे की मरम्मत के लिए प्रशासन ने कोई पहल नहीं की।
बिशन दास, मेघ राम, नारायण दत्त, नरेश कुमार और कालीदास का कहना है कि बरसात का मौसम नजदीक है और यदि समय रहते सुरक्षा प्रबंध नहीं किए गए तो मंदिर व साथ लगने वाले प्राइमरी स्कूल की इमारत को गंभीर खतरा हो सकता है। बाढ़ से क्षतिग्रस्त रास्तों की मरम्मत भी अब तक नहीं हुई है जिससे लोगों को रोजाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि मंदिर और स्कूल की सुरक्षा के लिए क्रेट लगाए जाएं ताकि भविष्य में पानी के बहाव से इन स्थलों और गांव के करीब 70 घरों को बचाया जा सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कदम नहीं उठाए तो आने वाली बरसात में एक बार फिर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।