सननघाट के शिव मंदिर में जारी शिव महापुराण की कथा का श्रवण करते भक्तजागरूक पाठक
सातवें दिन कथाव्यास रामदास अनुरागी ने भगवान के नंदीश्वर अवतार का प्रसंग सुनाया
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। बसोहली उपमंडल के ग्राम सननघाट के शिव मंदिर में श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन जारी है। यहां भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। कथा के सातवें दिन कथाव्यास रामदास अनुरागी ने भगवान के नंदीश्वर अवतार प्रसंग सुनाते हुए बताया कि किस प्रकार से भगवान के चरण में स्थान पाया जा सकता है।
राम दास अनुरागी ने बताया कि प्राचीन काल में शिलाद नाम के एक ऋषि थे। वे एक ऐसे पुत्र की कामना करते थे जो अमर हो। उन्होंने इसके लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या की। भगवान ने प्रसन्न होकर शिलाद ऋषि के यज्ञकुंड से एक तेजपूर्ण बालक के रूप में अवतार लिया जिसका नाम नंदी रखा गया।
नंदी को बचपन से ही शिव में अटूट आस्था थी। जब उन्हें ज्ञात हुआ कि उनका मानव जीवन अल्प है तो उन्होंने मृत्यु पर विजय पाने के लिए घोर तपस्या की। नंदी की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए। उन्होंने नंदी को न केवल अमरता दी बल्कि उन्हें अपने सबसे प्रमुख गण कैलाश का द्वारपाल और अपना वाहन (वृषभ) बनने का वरदान दिया।
शिवजी ने देवताओं और ऋषियों के सामने नंदी का अभिषेक किया और उन्हें नंदीश्वर के रूप में स्थापित किया। उन्होंने नंदी का विवाह मरुत की पुत्री सुयशा के साथ कराया। नंदी ज्ञान पवित्रता व समर्पण के प्रतीक हैं।