डॉक्टर का पद खाली होने के चलते मशीन फांक रही धूल
निजी लैब पर लोगों को खर्च करने पड़ रहे छह हजार
कठुआ। जिला के जीएमसी अस्पताल में एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी की सुविधा बंद पड़ी है। करीब दो साल पूर्व जब मशीनें जीएमसी में इंस्टाल हुई थी तो जीएमसी प्रबंधन ने दावा किया था कि 10-15 दिनों में लोगों को यह सुविधा मिलनी शुरु हो जाएगी। मगर डाॅक्टर नहीं होने से मरीजों को निजी अस्पतालों या लैब में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
जिले के इस सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट यानि पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती भी नहीं हो पाई। ऐसे में जिलावासी जीएमसी में पेट, खाने की नली, छोटी और बड़ी आंत, आमाशय, लिवर और पेंक्रियाज से जुड़ी बीमारियों की जांच जम्मू जीएमसी या निजी अस्पतालों से करवाने को मजबूर हैं।जीएमसी कठुआ में अस्पताल की ओपीडी एवं इमरजेंसी में नगर समेत आसपास के गावों से पेट से जुड़ी बीमारियों के मरीज आते हैं। उनमें खाने की नली, पित्ते की पथरी, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत और पेंक्रियाज से से पीड़ित मरीज होते हैं। इस तरह के मरीजों को एंडोस्कोपी के लिए या तो जीएमसी जम्मू जाना पड़ता है या निजी अस्पतालों में 5 से 6 हजार रुपये खर्च कर यह जांच करवाने पड़ती है। अगर, जीएमसी में यह सुविधा आम मरीजों को मिले तो 100 से 150 रुपये में यह सुविधा मिल सकती है। जबकि आयुष्मान कार्ड धारकों को यही सुविधा मुफ्त में मिल सकती है। बता दें कि निजी अस्पतालों में कोलोनोस्कोपी जांच के लिए 3-4 हजार रुपये और एंडोस्कोपी जांच के लिए 5-6 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
दो साल पहले एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी जांच के लिए मशीनें आई थी। मशीनों का सेटअप लग चुका है। एक स्पेशलिस्ट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डा. सुशील शर्मा भी तैनात किए गए थे। उनकी ओर से इस मशीन से मरीजों की जांच की जानी थी। डॉक्टर के इस्तीफा दिए जाने के बाद से यह सारी सुविधा बंद पड़ी है। इस बारे में उच्चाधिकारियों को भी सूचित किया गया है।
- डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ