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Kathua News: शरीर ही वह साधन है जो हमें जन्म–मरण चक्र से मुक्ति दिलाता है

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कठुआ। संत निरंकारी सेवा मंडल की ओर से शहर से सटे चन्नग्रां में विशाल सत्संग का आयोजन किया गया। रविवार को आयोजित सत्संग में नगरी, कठुआ, मुटठी और बुद्धि शाखाओं से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सदगुरु माता सुदीक्षा के सानिध्य में आयोजित होने वाले इस सत्संग की अध्यक्षता निरंकारी मिशन के ज्ञान प्रचारक ज्योति प्रसाद ने की।
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इस मौके पर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते हुए ज्योति प्रसाद ने कहा कि संसार में इंसान का जन्म और मृत्यु एक चक्र है, जैसे सप्ताह के दिन और साल के मौसम बार–बार आते हैं। मनुष्य भी इसी जन्म–मरण के चक्र में बंधा हुआ है। उन्होंने कहा कि इंसान का जन्म विशेष है, क्योंकि देवता भी मानव जन्म पाने की इच्छा रखते हैं। यदि कोई इस चक्र से मुक्त हो सकता है तो वह इसी जीवन में संभव है, क्योंकि शरीर ही ऐसा साधन है जो मुक्ति दिला सकता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे किसान बीज बोता है तो उसमें पौधा और फल बनने की संभावना होती है, लेकिन यदि बीज पत्थर पर गिर जाए या कीड़ा लग जाए तो संभावना समाप्त हो जाती है। उसी तरह मनुष्य जीवन भी एक अवसर है, जिसमें आत्मिक फल की प्राप्ति हो सकती है। आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है वह अमर और अजर है। मृत्यु केवल शरीर की होती है, आत्मा की नहीं।
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