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Kathua News: किसानों को कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के बारे में किया जागरूक

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कठुआ। किसानों को पर्यावरण अनुकूल कीट प्रबंधन पद्धतियों के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विभाग के सब डिवीजन कार्यालय में किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र जम्मू की ओर से आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में सहायक निदेशक मिथिलेश कुमार मौर्य ने कीटनाशकों के सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि फसलों में लगने वाली कई तरह की बीमारियों से होने वाले नुकसान से बचने के लिए हम अकसर कीटनाशकों का उपयोग करते हैं। इससे न केवल भूमि की उर्वरा क्षमता प्रभावित हो रही है, फसल की गुणवत्ता भी कम हो रही है। इसे कम करने की जरूरत है। यह तभी संभव है कि किसान वातावरण में मौजूद कीटों की पहचान करने में सक्षम हो।
उन्होंने किसानों को बताया कि हमारी फसल में दिखाई देने वाले सभी तरह के कीट फसल को नुकसान नही करते हैं। फसल में दिखने वाले कीटों के बारे में अगर हम जानें तो यह दो प्रकार के होते हैं। एक वह जो हमारी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं और एक मित्र कीट भी पाए जाते हैं। कीटनाशक का उपयोग करने के दाैरान कई बार हम उन कीटों को भी मार देते हैं जो किसान मित्र कीट है।
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उन्होंने कीटों से होने वाले नुकसान से बचने के लिए उनकी ट्रैपिंग के उपायों और नीम जैसे आर्गेनिक कीटनाशक के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी ताकि टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देकर और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जाए। इसके अलावा किसानों को नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम मोबाइल एप की जानकारी दी गई। इससे किसानों को वास्तविक समय में कीट निगरानी डेटा और सलाह मिल सकेगी। इसमें बायो-कंट्रोल एजेंट की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया।
इस मौके पर किसानों ने इंटरेक्टिव सत्र में सक्रिय भागीदारी की। कीट संबंधी समस्याओं पर सवाल पूछे और विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई व्यावहारिक जानकारी की सराहना की। उन्होंने केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र जम्मू की टीम द्वारा जमीनी स्तर पर ऐसा सार्थक कार्यक्रम आयोजित करने के प्रयासों की प्रशंसा की।
कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी राज सिंह सुंबडि़या ने किसानों को जागरूक करते हुए कहा कि अकसर देखा जाता है कि किसान फसल में लगने वाली बीमारी से बचाव के नाम पर पेस्टीसाइट का उपयोग उसकी बिक्री करने वाले की सलाह पर कर लेते हैं। उसमें कई बार मात्रा कम अथवा ज्यादा होने की संभावना बनी रहती है। इससे किसान को आर्थिक नुकसान के साथ फसल के नुकसान का भी सामना करना पड़ जाता है। हमें कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग को कम करना होगा। इसके लिए जब भी फसल को कोई बीमारी लगे तो पहले कृषि सहायकों से इसके बारे में जानकारी लें और उसके बाद ही उपचार के उपाय को अपनाएं। इस मौके पर सब डिवीजन एग्रीकल्चर अफसर कमल राजन और प्लांट डॉक्टर मनमोहन शर्मा कृषि विभाग के कई अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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