कठुआ। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाए जाने वाले संकट चतुर्थी व्रत पर मंगलवार को जिलेभर में धार्मिक उत्साह देखने को मिला। महिलाओं ने पुत्रों की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ दिनभर उपवास रखा और पारंपरिक विधिविधान से पूजा-अर्चना की।
सुबह सरगी के साथ व्रत की शुरुआत हुई। इसके बाद महिलाओं ने बाजारों से गुड़, तिल, गन्ना और मूली की खरीदारी कर भगवान गणेश की पूजा की तैयारी की। शहर के मंदिरों में दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ रही, जहां महिलाओं ने गणपति की आराधना कर संतान की रक्षा और परिवार के कल्याण का आशीर्वाद मांगा। इस पर्व ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट किया बल्कि समाज में पारिवारिक सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु के लिए सामूहिक प्रार्थना का वातावरण भी निर्मित किया।
चंद्रोदय के समय महिलाओं ने चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित कर व्रत का समापन किया। इस अवसर पर तिल, गुड़, गन्ना और मूली का दान करने की परंपरा निभाई गई। कई महिलाओं ने पुत्रों की ढाई मुट्ठी बुग्गा सहित पूजन सामग्री का दान कर व्रत की पूर्णता की।
वार्ड-2 निवासी मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि संकट चतुर्थी व्रत के पीछे प्रचलित कथा भगवान गणेश की कृपा से जुड़ी है। कथा के अनुसार एक विधवा ब्राह्मणी का पुत्र कुम्हार द्वारा बलि स्वरूप आग में डाल दिया गया था, लेकिन गणेश जी की कृपा से वह सुरक्षित रहा। बाद में राजा के आदेश से इस घटना की स्मृति में हर वर्ष माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट चतुर्थी व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ निभाई जाती है।