महिलाओं ने संभाली 44 इकाइयों की कमान
एचएडीपी योजनाओं की जानकारी, लाभ पंजीकरण और अन्य ऑनलाइन सेवाएं करवा रहीं उपलब्ध
कठुआ। किसान खिदमत घर महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और नेतृत्व का प्रतीक बनते जा रहे हैं। दो पंचायतों पर एक किसान खिदमत इकाई की स्थापना के इस कार्यक्रम में महिलाओं का उत्साहजनक रुझान सामने आया है।
जिला कृषि विभाग की ओर से खोले जाने वाले 120 किसान खिदमत घरों में से 115 पहले ही शुरू हो चुके हैं। इनमें 71 इकाइयों का संचालन पुरुष कर रहे हैं जबकि 44 इकाइयों की कमान महिलाओं ने संभाली है। यह आंकड़ा ग्रामीण समाज में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और सार्वजनिक सेवा क्षेत्र में आत्मविश्वास को दर्शाता है। इन खिदमत घरों में किसानों को एचएडीपी योजनाओं की जानकारी, लाभ पंजीकरण और अन्य ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध करवा रही हैं।
साथ ही यह इकाइयां कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) की भूमिका भी निभा रही हैं जिससे ग्रामीणों को बीमा, मोबाइल रिचार्ज और सरकार की 257 ऑनलाइन सेवाओं तक पहुंच मिल रही है।
हीरानगर ब्लॉक के पथवाल गांव की महिला संचालिका मानवी शर्मा ने बताया कि उन्होंने जिला कृषि विभाग के सहयोग से अपना किसान खिदमत घर शुरू किया है। यहां वह किसानों को एचएडीपी की ऑनलाइन सेवाओं का लाभ दिला रही हैं और ग्रामीणों को सीएससी की सुविधाएं भी प्रदान कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ से 15 दिन का प्रशिक्षण लेकर पेस्टिसाइड्स का लाइसेंस प्राप्त किया है और जल्द ही फर्टिलाइजर का लाइसेंस मिलने की उम्मीद है। मानवी का कहना है कि पांच महीने के अनुभव ने उन्हें न केवल अपने गांव के लोगों को बेहतर सुविधा देने का अवसर दिया है बल्कि आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखाई है।
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प्रत्येक किसान खिदमत घर को टच स्क्रीन, बायोमेट्रिक, सीसीटीवी, कंप्यूटर, प्रिंटर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम, कैमरा, यूपीएस विद सोलर सिस्टम और आवश्यक फर्नीचर जैसी सुविधाएं लगभग साढ़े आठ लाख रुपये की लागत से निशुल्क उपलब्ध कराई गई हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को ऑनलाइन सेवाओं से जोड़ना और युवाओं को रोजगार का अवसर देना है।
कोट
जिले में 44 महिलाओं का किसान खिदमत घरों का संचालन करना इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं अब केवल परिवार तक सीमित नहीं बल्कि सार्वजनिक सेवा और ग्रामीण विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ी हैं। यह पहल न केवल कृषि को सशक्त बना रही है बल्कि महिलाओं को सामाजिक नेतृत्व और आर्थिक स्वतंत्रता की नई पहचान भी दे रही है।
- सुरेंद्र मिश्रा, नोडल अधिकारी जिला कृषि विभाग