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Kathua News: नीलम ने मशरूम की खेती शुरू की और 15 महिलाओं को भी स्वरोजगार से जोड़ा

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मशरूम इकाई में काम करती नीलम देवी।  - फोटो : kathua news
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कठुआ। हीरानगर के जांडी गांव की नीलम रानी जो कभी एक साधारण गृहिणी थीं, आज महिला सशक्तिकरण की प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। उन्होंने पारंपरिक कृषि कार्यों में संलग्न रहते हुए अपनी मेहनत और नवाचार से एक नई पहचान बनाई। आज वह जिले में मशरूम उत्पादन कर न केवल खुद आत्मनिर्भर हो चुकी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी इसका प्रशिक्षण दे रही है।
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आत्मनिर्भर महिला के रूप में अपना सफर शुरू करने वाली नीलम रानी ने वर्ष 2017 में कृषि विभाग के संपर्क में आने के बाद वसुंधरा महिला स्वयं सहायता समूह की स्थापना की। उन्होंने एक पोल्ट्री शेड में 1500 बैग से सफेद बटन मशरूम का उत्पादन शुरू किया। मशरूम की खेती जो तापमान और आर्द्रता के प्रति संवेदनशील होती है। लिहाजा इससे उन्हें 45 क्विंटल की उपज प्राप्त हुई। उनकी इस पहल से प्रेरित होकर आसपास की 15 से अधिक महिलाएं भी मशरूम उत्पादन से जुड़ गईं, जिससे क्षेत्र में महिला नेतृत्व और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बल मिला।
इसके बाद कृषि विभाग द्वारा उन्हें और उनके समूह को मशरूम उत्पादन, अचार निर्माण, जैविक खेती और सब्जी उत्पादन जैसे कार्यों में प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही उन्हें कठुआ, बनी, बसोहली और बिलावर के किसान सुविधा केंद्रों के माध्यम से बाजार से जोड़ा गया, जिससे उत्पादों को उचित मूल्य मिल सके। वहीं, सरकारी सहयोग और संरचना निर्माण के तहत जिला कैपेक्स बजट 2022-23 से उन्हें 75 हजार रुपये की सब्सिडी पर 25x16x12 आकार का मशरूम शेड प्रदान किया गया। इसके अलावा उन्हें कठुआ के मशरूम प्रशिक्षण केंद्र में विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया, जिससे उनकी तकनीकी दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
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नीलम रानी को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे द्वारा कठुआ में आयोजित सार्वजनिक कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त, जम्मू में आयोजित किसान सम्मेलन में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया।



नीलम रानी की यह यात्रा न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है कि वे भी नवाचार और सहयोग से समाज में नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं। उनकी सफलता महिला सशक्तीकरण, सामुदायिक विकास और कृषि क्षेत्र में संभावनाओं का प्रतीक बन चुकी है।
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