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Kathua News: जेजेएम के तहत करोड़ों पानी की तरह बहाए, काम कुएं ही आए

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हीरानगर। जल जीवन मिशन (जेजेएम) की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। इसका लक्ष्य 2024 तक हर ग्रामीण घर तक नल से जल पहुंचाना है, लेकिन 2025 का आधा साल गुजरने के बाद भी लोग पेयजल सुविधा को तरस रहे हैं। करोड़ों की लागत से ओवरहेड टैंक, ट्यूबवेल और पाइपलाइन बिछाने का काम किया गया लेकिन जमीन स्तर पर स्थित अभी भी चिंताजनक है। आज भी कंडी के कई गांवों के लोग पुराने जल स्रोतों पर निर्भर हैं। लोग पुराने कुओं से और बावलिया से पानी पी रहे हैं। कंडी इलाके में पेयजल की समस्या प्रमुख समस्याओं में से एक है। इसके समाधान का इंतजार लोग सालों से कर रहे हैं। हीरानगर उप मंडल में करीब 56 नए ट्यूबवेल जल जीवन मिशन के तहत बनने हैं। इनमें से 50 के करीब का काम पूरा हो गया है। इसी तरह करीब 65 ओवरहेड टैंक बनाए जाने हैं, जिनमें से 50 से 55 का काम पूरा हो चुका है लेकिन जहां काम पूरा हो चुका है वहां भी लोगों के नलों से पानी की बूंद नहीं टपकी है।
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गर्मी के मौसम में पेयजल को लेकर लोगों की परेशानी और बढ़ गई है लेकिन संबंधित विभाग परेशानी के समाधान के लिए गंभीर नहीं दिख रहा है। मंगलूर के पूर्व सरपंच कुलभूषण सिंह ने बताया कि इलाके में करोड़ों रुपये की लागत से ओवरहेड टैंक तो बन गया है लेकिन अभी तक इससे सप्लाई शुरू नहीं हुई है। अभी भी इस क्षेत्र के कुछ मोहल्ले और इसके साथ लगते कुछ गांव में लोगों को मीलों पैदल चलकर कुओं से पानी लाना पड़ता है। सरकार तो जल जीवन मिशन के तहत लोगों के घर तक पानी पहुंचाने के दावे कर रही है लेकिन फिलहाल यह दावे खोखले ही साबित हो रहे हैं।

डिंग अंब बी के पूर्व सरपंच सुरेंद्र वर्मा ने कहा, जल जीवन मिशन योजना का अभी तक लोगों को कोई लाभ नहीं हुआ है। उनकी पंचायत में दो प्रोजेक्ट चल रहे हैं जो अभी पूरे नहीं हुए हैं। आज भी कुछ गांवों के लोग 3 से 4 किलोमीटर पैदल चलकर बावलिया से पानी लाते हैं। उन्होंने कहा अपने पीने के लिए तो लोग पैदल चलकर पानी ले आते हैं लेकिन मवेशियों के लिए कहां से लाएं। उनकी पंचायत में कुछ इलाका पहाड़ी है जहां पानी के टैंकर का पहुंचना भी नामुमकिन है।
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कोट
इस मुद्दे को उन्होंने विधानसभा में भी उठाया था। करोड़ों की लागत से ओवरहेड टैंक ट्यूबवेल और पाइपलाइन तो बिछाए गए हैं लेकिन पानी सप्लाई की व्यवस्था का कोई प्रबंध नहीं है। मैनपावर की कमी है, नई भर्ती की जरूरत है, अस्थायी कर्मचारियों को भी पक्का नहीं किया गया। यह सब किए बिना परियोजना पूरी होने के बावजूद भी लोगों को पानी सप्लाई करना नामुमकिन लगता है।
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-राजीव जसरोटिया, विधायक
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