जम्मू। केंद्रीय विश्वविद्यालय ने भारतीय सामरिक विचार और युद्ध-भारतीय ज्ञान प्रणाली पर ऑनलाइन पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) का शुभारंभ किया। विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन विभाग (एनएसएस) की ओर से इसका आयोजन किया गया। इसमें नौसेना की रणनीतियों और प्राचीन समुद्री राज्यों द्वारा अपनाई गई युद्ध पद्धतियों को समझने के महत्व पर जोर दिया।
17 से 21 मार्च तक आयोजित कार्यक्रम के पहले दिन मद्रास विश्वविद्यालय के रक्षा और सामरिक अध्ययन विभाग के प्रमुख प्रो. उथम कुमार जमदग्नि मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता थे। इस दौरान केंद्रीय विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन विभाग की प्रमुख डॉ. नीता रानी ने विषय के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी। भारतीय ज्ञान प्रणाली के महत्व, भारतीय सैन्य रणनीति और युद्ध पर इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
अपने विशेष व्याख्यान में प्रो. उथम कुमार जमदग्नि ने समुद्री शक्ति: प्राचीन भारतीय समुद्री अभियान की रणनीतिक प्रतिभा का व्यापक अवलोकन किया। भारतीय समुद्री रणनीतिक विचार की प्राचीन प्रथाओं और पूर्व-औपनिवेशिक इतिहास को समझाया। उन्होंने विजयनगर, संगम और मराठा राजवंशों की समुद्री शक्तियों और क्षमताओं पर प्रकाश डाला। इसमें बताया कि कैसे भारत भारतीय ज्ञान प्रणाली का उपयोग करके एक समुद्री शक्ति के रूप में उभर सकता है।