दो राज्यों की आपसी खींचतान से किसानों को नुकसान हो रहा है। वर्ष 1979 में पंजाब के साथ हुए अनुबंध, आज तक परवान नहीं चढ़ पाया। वहीं जम्मू-कश्मीर के सतावांई में भूमिगत नहर परियोजना भी ठंडे बस्ते में जा चुकी है। ऐसे में लाखों कनाल की भूमि बिना सिंचाई के बंजर होने की कगार पर पहुंच चुकी है।
इसके साथ ही बिना सिंचाई के किसानों को भी हर वर्ष नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकारें बदलीं, नियम बदले और साथ ही बदल गई विभिन्न प्रोजेक्ट को आगे ले जाने की मंशा भी। ऐसे में भूमिगत नहर प्रोजक्ट का काम ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसे में अब जिला की सबसे बड़ी रावी-तवी नहर में पानी लाने के लिए प्रयास भी ठंडे बस्ते में ही हैं।
किसानों को हर साल सिंचाई न हो पाने के कारण भारी नुकसान हो रहा हैख् लेकिन हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जा चुके हैं। उन्हें पूरा करने के लिए अब न तो सरकार है और न ही विभाग की ओर से प्रयास। वर्ष 1979 में पंजाब के साथ अनुबंध कर जिला में रावी तवी नहर के माध्यम से 1100 क्यूसेक पानी जम्मू-कश्मीर को दिया जाना था।
इसके लिए शाहपुर कंडी में 2281 करोड़ की लागत से एक बांध बनाकर पानी को रोकना और फिर राज्य जम्मू-कश्मीर को भेजा जाना था। लेकिन तीन दशकों का समय बीत जाने के बाद भी इस अनुबंध को पूरा नहीं किया गया। जिसके कारण हर साल 1100 क्यूसेक पानी की कमी के कारण जिला में ठीक से सिंचाई नहीं हो पाई।
विभागीय सूत्रों के अनुसार पंजाब द्वारा अनुबंध पूरा न किए जाने के बाद राज्य सरकार ने वर्ष 2010 में रंजीत सागर बांध से भूमिगत नहर निकालकर सतवांई के रास्ते से पानी रावी-तवी नहर में डालने का प्रोजेक्ट बनाया गया। तत्कालीन मंत्री ने इस प्रोजेक्ट को मंजूर किया।
करीब 400 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से पंजाब द्वारा मिलने वाले 1100 क्यूसेक पानी को रंजीत सागर बांध से ही लेने की योजना थी। लेकिन वर्ष 2014 में सरकार बदलने के साथ ही नए मंत्री ने इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसके पीछे पंजाब के साथ बैठक कर पुराने अनुबंध को फिर शुरू करने का ही हवाला दिया गया।
हजारों करोड़ की दो योजनाओं के ठंडे बस्ते में जाने से अब जिला में सिंचाई व्यवस्था का बुरा हाल है। वर्ष 1979 में पंजाब का अनुबंध पूरा नहीं हुआ। कई वर्षों बाद जब काम शुरू हुआ तो राज्य का अपना एक प्रोजेक्ट मंजूर हो चुका था। सरकार बदलने के बाद राज्य का अपना प्रोजेक्ट भी ठंडे बस्ते चला गया।
पंजाब वाले शाहपुर कंडी प्रोजेक्ट को तो पहले ही बंद करवा दिया गया था। कार्यकारी अभियंता आरटीआईसी मदनलाल ने बताया कि सरकार बदलने के बाद भूमिगत नहर योजना को बंद किया गया।
पंजाब वाले प्रोजेक्ट को पहले ही बंद कर दिया गया था। सरकार ने कहा था कि पंजाब वाले अनुबंध पर ही काम किया जाएगा। इसके लिए तीन बार सचिव स्तर की बैठक हो चुकी है। वर्तमान में दोनों प्रोजेक्ट बंद हैं।