-सीईटीपी को ओसीईएमएस पोर्टल पर पंजीकरण का निर्देश
-सीईटीपी से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों की सूची भी मांगी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। घाटी औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों से निकलने वाले दूषित पानी की समस्या से त्रस्त किसानों के आवाज उठाने पर जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति (जेकेपीसीसी) ने सख्ती दिखाई है। अनुपचारित अपशिष्ट नाले में छोड़ने पर रोक लगाई है। सिडको इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स घाटी का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) बंद पाए जाने पर चेतावनी भी दी है।
कठुआ जिले की औद्योगिक इकाइयों पर जल प्रदूषण अधिनियम, 1974 की धारा 33(ए) के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए कई निर्देश जारी किए गए हैं। दरअसल, आठ जनवरी को प्रदूषण नियंत्रण समिति के चेयरमैन की अध्यक्षता वाली टीम ने क्षेत्र का दौरा किया गया था। यह दौरा विधानसभा की कमेटी के चेयरमैन के दौरे के बाद किया गया। कमेटी ने जेकेपीसीसी को मौके पर जाकर स्थिति की जांच के निर्देश दिए थे। निरीक्षण में पाया गया कि घाटी स्थित सीईटीपी गैर कार्यशील है। किसानों ने शिकायत में बताया कि सिडको औद्योगिक अपशिष्ट को नालों के माध्यम से कृषि भूमि में छोड़ रहा है। इससे जलभराव और खेतों में प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो रही है। फसलें भी बर्बाद हो रही हैं।
समिति ने निर्देश दिया है कि सिडको तुरंत सीईटीपी की मरम्मत और संचालन सुनिश्चित करे। अपशिष्ट को सुरक्षित पाइपलाइन नेटवर्क से सीईटीपी तक पहुंचाए। सिडको से इस सीईटीपी से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों की सूची भी मांगी गई है। प्रस्तावित 200 केएलडी एसटीपी की स्थिति रिपोर्ट और पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों का अनुपालन विवरण जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। सीईटीपी को ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीईएमएस) पोर्टल पर पंजीकृत करना अनिवार्य किया गया है।
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नोटिस के बावजूद सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए
गांव चक रामचंद के लोगों ने शिकायत दी थी कि एजिओस पॉली फिल्म्स इकाई बिना उपचारित अपशिष्ट स्थानीय नाले में छोड़ रही है। प्रदूषण नियंत्रण समिति के अनुसार निरीक्षण में यह सही पाया गया और पूर्व नोटिस के बावजूद सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। समिति ने निर्देश दिया कि अनुपचारित अपशिष्ट का नाले में प्रवाह तुरंत रोका जाए। बाइपास लाइन बंद की जाए और अपशिष्ट को बंद पाइपलाइन से सीईटीपी तक पहुंचाया जाए। आवश्यकता पड़ने पर 31 मार्च तक सीईटीपी की क्षमता बढ़ाने के भी निर्देश दिए गए। तब तक उत्पादन मौजूदा क्षमता के अनुरूप सीमित रखने के लिए कहा गया है।
निर्देशों का पालन नहीं करने पर इकाइयों का संचालन होगा निलंबित
समिति ने बताया कि किसानों की शिकायत के बाद निरीक्षण में पाया गया कि एक्सिओम फूड्स एंड बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने वाहन युक्त टैंकर और बाइपास पाइपलाइन का उपयोग कर अनुपचारित अपशिष्ट सीधे उज्ज दरिया में छोड़े। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्थापित सीईटीपी की क्षमता अपर्याप्त है। समिति ने निर्देश दिया है कि अनुपचारित अपशिष्ट को बाहर नहीं छोड़ा जाए। अपशिष्ट को सिडको द्वारा संचालित सीईटीपी तक पहुंचाया जाए। जैविक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर स्थापित किया जाए। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित इकाइयों का संचालन निलंबित कर दिया जाएगा और पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जाएगी।