पंजाब से सटी राज्य की सरहद का जितना फायदा लोगों को मिल रहा है, उससे कहीं अधिक नुकसान भी चुकाना पड़ रहा है। राज्य में धारा 370 के कारण बाहरी लोगों को यहां खरीद-फरोख्त, व्यवसाय की अनुमति नहीं है।
फिर भी बाहरी राज्यों के मछुआरों की दखल बढ़ती जा रहा है। वे चंद रुपये का प्रलोभन देकर स्थानीय लोगों को मोहरा बना रहे हैं। उन्हीं के बल पर राज्य की संपदा का दोहन कर रहे।
पिछले सात वर्षों से लगातार रावी दरिया (जम्मू कश्मीर) के 60 प्रतिशत हिस्से वाली रंजीत सागर झील से मत्स्य पालन विभाग खुली बोली लगवाकर राज्य को अधिक मुनाफे की ओर ले जाने के दावे करता है। लेकिन इस प्रक्रिया से लगभग 200 परिवारों की रोजी रोटी पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं।
लगभग दो वर्षों से इनमें से अधिकतर पेशेवर मछुआरे परिवार इस व्यवसाय से मुंह मोड़ चुके हैं। शनिवार को स्थानीय मजदूरों का शिष्टमंडल एसडीएम बसोहली से मिला और इस समस्या को अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि रंजीत सागर बांध से जहां रात के समय अवैध रूप से मछलियां पकड़ी जा रही हैं।
स्थानीय मछुआरों के हक को नजरअंदाज करते हुए बाहरी राज्यों के मछुआरों को काम पर लगाया गया है। मछुआरों में शामिल मंजूर अहमद, मंगलू राम, परवेज अहमद, तारिक हुसैन, नेक मोहम्मद आदि ने बताया कि विभाग के राजस्व में बढ़ोत्तरी के बाद भी अधिकतर मछुआरों को पुरानी दर से ही मछलियां पकड़ने का मेहनताना दिया जाता है।
इससे इंकार करने वालों को ठेकेदार काम पर नहीं रख रहा। शिष्टमंडल में आए लोगों ने बाकायदा शिकायत की प्रतियां जिला उपायुक्त और मछली पालन विभाग के उच्च अधिकारियों को भी भेजी हैं।
सहायक निदेशक, मत्स्य पालन विभाग पवन शर्मा ने कहा कि पिछले साल हुए टेंडर में तीन साल का कांट्रैक्ट सालाना दस फीसदी इजाफे के साथ दिया गया। इस बीच स्थानीय मछुआरे प्रति किलो के हिसाब से मेहनताना बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया।