सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग करते हुए छब्बे चक के ग्रामीणों ने रविवार को हीरानगर में जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर पंद्रह दिन में उनकी सुध नहीं ली गई तो जिला उपायुक्त कार्यालय का घेराव किया जाएगा।
यही नहीं, मांगों के समर्थन में आमरण अनशन भी किया जा सकता है। इसके बाद भी अगर उनकी समस्याओं का हल नहीं होता है तो वह विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करने से भी परहेज नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सुविधाओं के अभाव में उनका जनजीवन अस्तव्यस्त है।
प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए विनय शर्मा ने कहा कि कभी पीएमजीएसवाई तो कभी नाबार्ड योजनाओं के तहत सड़क बनाने की बात कही जाती है। लेकिन दशकों बाद भी यह सुविधा प्राप्त नहीं हो सकी। तरसेम शर्मा, मंगलदास ने कहा कि गांव से पक्की सड़क चार किलोमीटर दूर है।
आशा देवी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की हालत खराब होने पर उन्हें अस्पताल तक पहुंचाना जोखिम भरा हो जाता है। पक्की सड़क नहीं होने से उनकी हालत और खराब हो जाती है। कभी-कभी तो रास्ते में ही प्रसव की नौबत आ जाती है।
छात्रा रेखा देवी और मोनिका बाला ने कहा कि उनके लिए स्कूल जाना बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। चार किलोमीटर पैदल चलने के बाद वाहन मिलता है। समय पर नहीं पहुंचने पर वाहन नहीं मिल पाता है और घर लौटना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भाग नाले में पानी भरने के दौरान उन्हें जान हथेली पर रखकर स्कूल जाना पड़ता है।
प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि सड़क सुविधा नहीं होने का असर अन्य सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उनके सामने आंदोलन के सिवाय विकल्प नहीं है।