जम्मू। आईआईएम जम्मू की दस साल की यात्रा के जश्न में शामिल छात्रों के लिए यह सिर्फ एक शैक्षणिक अनुभव नहीं, बल्कि एक मानसिक बदलाव की भी शुरुआत है। विभिन्न राज्यों से आए एमबीए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि जम्मू को लेकर उनके और उनके परिवारों के मन में जो डर और संकोच थे, वह यहां आकर पूरी तरह बदल गए हैं। अब न केवल पढ़ाई को लेकर संतोष है, बल्कि शहर के माहौल, सुरक्षा और संस्थान की सकारात्मक सोच ने उन्हें आत्मविश्वास से भर दिया है।
हरियाणा के सोनीपत की छात्रा मनु बताती हैं कि जम्मू को लेकर बाहर एक अलग तरह की धारणा बनी हुई है। जब मैंने यहां एडमिशन लिया, तो घर में सबसे पहले यही सवाल उठा कि क्या यह जगह सुरक्षित है? क्या वहां सामान्य जीवन है? जब वह पहली बार जम्मू आईं, तो उन्हें खुद भी थोड़ा डर था, लेकिन एक हफ्ते के भीतर वह सहज हो गईं। संस्थान के परिसर से लेकर शहर तक, हर जगह सहयोगी और सुरक्षित माहौल मिला। अब घरवालों को भी तसल्ली है।
कैंपस का वातावरण शांत, पढ़ाई के लिए उपयोगी
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी से आए राजकुमार ने भी कुछ ऐसा ही अनुभव साझा किया। राजकुमार ने बताया कि जम्मू के बारे में जो सुना था और यहां जो देखा, उसमें जमीन-आसमान का फर्क है। यहां के लोग मिलनसार हैं। राजकुमार का मानना है कि जम्मू जैसे शहरों को लेकर जो नकारात्मक धारणाएं बाहर बनती हैं, वे सिर्फ दूरी और जानकारी के अभाव का नतीजा हैं।
हिमाचल प्रदेश के मनाली के रहने वाले सृजन ने कैंपस के वातावरण की तुलना शांति और फोकस से की। उन्होंने कहा कि मैं पढ़ाई के लिहाज से शांत माहौल चाहता था और जम्मू ने वह उम्मीद पूरी की। कैंपस की लोकेशन, सुविधाएं, और सबसे बढ़कर, यहां की शिक्षण शैली बहुत प्रोफेशनल है। सृजन ने बताया कि स्थापना दिवस के मौके पर जो विशेषज्ञ पैनल आया था, उसने उन्हें और भी भरोसा दिया कि वे एक सही संस्थान में हैं।