पिछले 12 साल से ठप पड़ी सेवा तीन जलविद्युत परियोजना को लेकर एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी है। स्थानीय विधायक ठाकुर दर्शन सिंह ने इस संबंध में उपमुख्यमंत्री के संज्ञान में मामला लाया है जिसके बाद विभागीय हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने परियोजना के लिए उचित कार्रवाई को लेकर बिजली विभाग के वित्त आयुक्त को भी लिख दिया है।
दरअसल, 12 साल तक इस परियोजना के बंद रहने से राज्य सरकार को अब तक करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा है। नौ मेगावॉट बिजली उत्पादन क्षमता वाली इस परियोजना को लेकर यह कहा जाए कि लंबे समय सरकार ने आंखें ही मूंद ली हैं तो गलत नहीं होगा। हालत यह है कि बिना काम हुए टरबान से लेकर पावर हाउस की मशीनरी भी दम तोड़ चुकी है। हाल फिलहाल के वर्षों में परियोजना को लेकर पहले सात से आठ करोड़ फिर नई मशीनरी के लिए 15 करोड़ की प्रस्तावित डीपीआर भी प्रदेश प्रशासन के टेबल पर धूल फांकती रही। जम्मू कश्मीर में सरकार बहाली के बाद इस परियोजना को लेकर फिर उम्मीद जगी। अब विधायक ने भी सरकार के समक्ष मामला उठाया है।
इसके लिए सरकार ने आईआईटी रूड़की से विशेष तौर पर डीपीआर तैयार करवाई। बाकायदा रूड़की से विशेषज्ञों की टीम ने सेवा तीन परियोजना को हुए नुक्सान वाली साइट का निरीक्षण भी किया था। नहर की मरम्मत हुई भी कई साल बीत चुके हैं। लेकिन अब टरबाइन की हालत ऐसी हो गई है कि इसकी बड़ी मरम्मत के बिना बिजली उत्पादन नहीं हो सकता है। परियोजना से जुड़े पूर्व अधिकारियों के अनुसार सरकारी उदासीनता ने इस परियोजना की टरबाइनों को कबाड़ में तो वहीं इमारत को खंडहर में बदल दिया है। यहां स्टाफ नियुक्त है लेकिन काम कुछ भी नहीं होता है। यदि यहां बिजली उत्पादन होता तो प्रदेश सरकार के पास आसपास के दर्जनों गांव को रोशन करने के लिए नौ मेगावॉट तक अपनी बिजली होती। मामला अमर उजाला की ओर से भी लगातार उठाया गया है।
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अबतक लग चुकी है करोड़ों की चपत
जम्मू कश्मीर सरकार की इस अपनी पनबिजली परियोजना में वर्ष 2013 तक हर घंटे लगभग 72 हजार रुपये की बिजली का उत्पादन होता था जो बसोहली और बनी क्षेत्र को मिलती थी। बाद में महानपुर ग्रिड में लाइन के जुड़ जाने से बिलावर को भी मिलती रही। बीते साल उच्च स्तरीय एक टीम ने परियोजना स्थल का दौरा भी किया लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई।
कठुआ जिले के हट्ट स्थित सेवा तीन जलविद्युत परियोजना राज्य सरकार की अपनी परियोजना है ऐसे में बीते 12 सालों में ही परियोजना से होने वाली बिजली उत्पादन के न होने से 40 करोड़ रूपए से अधिक की चपत का अनुमान है। लेकिन नुकसान का आंकड़ा यहीं खत्म नहीं होता इस परियोजना के बंद रहने पर भी कर्मचारियों और अधिकारियों की बाकायदा इस परियोजना में तैनाती रही। प्रति माह लाखों रूपए वेतन के तौर पर जारी होते रहे हैं। ऐसे में यदि अनुमान लगाया जाए तो परियोजना के बंद रहने से राज्य सरकार को करोड़ों की चपत लगी है। रावी दरिया से सटे माश्का गांव में स्थित सेवा तीन विद्युत परियोजना की क्षमता नौ मेगावाट है। वर्ष 2002 में कमीशन हुई परियोजना जम्मू कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कारपोरेशन की अपनी परियोजना है। क्षमता के अनुसार तो नहीं, लेकिन परियोजना सामान्य तौर पर रोजाना 50 से 60 हजार यूनिट बिजली पैदा करती रही है।
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बनी, बसोहली और बिलावर के इलाकों को बिजली की कमी के दिनों में यह परियोजना एक बेहतर विकल्प उपलब्ध करवा सकती है। मुख्यमंत्री को इस संबंध में लिखा गया था जिसके बाद बिजली विभाग के वित्त आयुक्त को इस परियोजना के संबंध में उचित कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। परियोजना के पुनर्जीवन से गांव माश्का सहित पूरे बसोहली क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को बड़ा लाभ मिलेगा और लोगों को लंबे समय से चली आ रही बिजली कटौती की समस्या से राहत मिलेगी।
ठाकुर दर्शन सिंह, बसोहली विधायक