पुलिस विभाग में होमगार्ड के तौर पर सेवाएं दे रहे सदस्यों ने अन्य राज्यों की तर्ज पर वेतन देने और नियमितीकरण की मांग पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मिलकर आए हैं। उन्होंने बाकायदा अपनी पूरी बात को गृह मंत्री के समक्ष रखा है।
इसके बावजूद भी यदि उनकी सुनवाई नहीं की गई, तो ऑल जम्मू कश्मीर होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन न सिर्फ संघर्ष करेगी, बल्कि कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाएगी। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए एसोसिएशन अध्यक्ष कमला शर्मा ने कहा कि पिछले 22 वर्ष से होमगार्ड सदस्यों का शोषण किया जा रहा है।
देश के अन्य राज्यों में भी पुलिस विभाग के होमगार्ड विंग में भर्ती की जाती है। लेकिन उनका न्यूनतम वेतन 15 हजार रुपये तक होता है। जबकि, इसकी तुलना में रियासत के होमगार्ड सदस्यों को महीने का 500 रुपये का वेतन ही दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार ने राज्य के 27 हजार एसपीओ का वेतन दोगुना कर दिया है।
महज चार हजार संख्या वाले होमगार्ड सदस्यों के लिए कोई फैसला नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा और शारीरिक योग्यता के तमाम मानकों पर खरा उतरने के बाद ही होमगार्ड युवाओं को भर्ती किया जाता है। लेकिन, वेतन के नाम पर महीने के 500 रुपये उनके साथ मजाक है।
पिछले दस वर्ष से स्थायी करने और वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वह और इंतजार नहीं करेंगे। एक महीने के भीतर उनकी सुनवाई नहीं हुई तो वह संघर्ष को तेज करने को मजबूर हो जाएंगे। गृहमंत्री से मिलने गए सदस्यों में रेखा सिंह, शोभा सिंह, मुश्ताक अहमद, बिलाल अहमद, मुश्ताक अहमद डार, आरती कुमारी मुख्य रूप से शामिल थे।