जिला में तीन विभागों के कर्मचारी बेमियादी हड़ताल पर हैं। लोक निर्माण विभाग के कैजुअल कर्मी, जहां बाइस दिन से अपनी मांगों के लिए हड़ताल कर रहे हैं, वहीं बिजली विभाग के साढ़े पांच सौ कर्मचारी जिलाभर में नियमित करने की मांग पर अड़े हैं।
बारह महीने से वेतन न मिलने से परेशान फीमेल मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बाहर कामकाज छोड़कर धरने पर बैठी हैं। कहीं, वेतन नहीं मिल रहा, कहीं नियमित नहीं किया जा रहा तो कहीं वेतन कहां से दिया जाता है, इसका पता नहीं है।
कुल मिलाकर तीनों विभागों के कर्मचारी सरकार से अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए कमर कस कर मैदान में उतर चुके हैं। हड़ताल पर रहने से जहां विभागों का कामकाज प्रभावित हो रहा है वहीं आम लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
शनिवार को भी बिजली विभाग के कर्मचारियों ने जिला भर में हड़ताल का सिलसिला जारी रखा। तीसरे दिन हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पीडीडी डेलीवेजर यूनियन के प्रधान रामकृष्ण ने बताया कि मजबूरन उन्हें हड़ताल का रुख अपनाना पड़ा है।
इससे पूर्व नेताओं से लेकर मंत्रियों के आश्वासनों पर कई बार हड़ताल का निर्णय वापस लिया गया था, लेकिन अब ऐसा नहीं किया जाएगा। या तो सरकार डेलीवेजरों को नियमित करे अन्यथा हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि जिला के हर बिजली अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना देकर डेलीवेजर हड़ताल पर बैठे हैं।
लोकनिर्माण विभाग के कैजुअल कर्मियों की हड़ताल बाइसवें दिन में प्रवेश कर गई। अब तक न तो किसी अधिकारी ने आंदोलनरत कर्मचारियों की सुध ली और न ही किसी नेता ने। प्रदर्शनकारियों में शामिल अजय कुमार ने बताया कि हड़ताल करने से कैजुअल कर्मियों की हालत और भी पतली हो गई है।
आर्थिक तंगी का शिकार कर्मचारियों को घर से कठुआ तक पहुंचने के लिए किराया जुटा पाना मुश्किल होता जा रहा है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के बाहर बारिश की फुहारों के बीच भी हड़ताल पर डटी हुई स्वास्थ्य विभाग की फीमेल मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर भी वेतन की मांग पर हड़ताल पर हैं।
दिनभर धरना देने के साथ ही उन्होंने अपने हक के लिए जोरदार नारेबाजी भी की। प्रदर्शनकारियों में शामिल सुरेष्टा देवी ने बताया कि मंत्री से लेकर अधिकारियों के दरवाजे पर वेतन जारी करने की गुहार लगाने के बाद उन्हें मजबूरन ऐसा करना पड़ रहा है।