बुधवार की सुबह भारी बारिश से तापमान में गिरावट आने से लोगों को गर्मी से राहत जरूर मिली, लेकिन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें आ गईं। कुछ दिन पहले ही भारी बारिश और नदी-नालों में बाढ़ से उपमंडल के कई किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी। किसान अभी उससे उबरे भी नहीं थे कि रही सही कसर बुधवार को हुई बारिश ने पूरी कर दी।
तेज हवा के साथ बारिश के कारण उपमंडल के सीमावर्ती इलाकों में धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है। कुछ इलाकों में बारिश और हवा के कारण फसल को नुकसान पहुंचा तो कुछ इलाकों में छोटी नहर में क्षमता से अधिक पानी छोड़े जाने से वह ओवरफ्लो हो गई, जिससे आसपास के खेत डूब गए। गोपाला चक पंचायत और उसके आसपास के इलाकों में उज्ज नहर की डिस्ट्रीब्यूटर 10(डी10) में छोड़े गए पानी से धान की फसल खेतों में बिछ गई। किसानों का कहना है कि पानी में डूबी यह फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई।
अशोक शर्मा, राम पाल, मंगा राम ने कहा डी 10 में पिछले दो दिनों से क्षमता से अधिक पानी छोड़ा जा रहा था। इससे फसलों के नुकसान का अंदेशा होने पर लोगों ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को सूचित भी किया लेकिन पानी छोड़ना बंद नहीं किया गया। बुधवार सुबह हुई तेज बारिश के कारण जलस्तर और बढ़ गया, जिससे इसका पानी खेतों में जा घुसा और धान की लगभग तैयार फसल पानी में डूब गई।