कठुआ। जिले का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसी) डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। इसका असर एक तरफ जहां अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं पर दिखता है, वहीं मेडिकल कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों पर फैकल्टी की कमी का असर पड़ रहा है। हालत यह है कि जीएमसी में सेंक्शन पदों के मुकाबले 55 फीसदी स्टाफ से काम चलाया जा रहा है।
इमरजेंसी की हालत में लोगों की सबसे बड़ी उम्मीद जीएमसी है। जिला भर से गंभीर घायल या बीमार को जीएमसी में लाया जाता है। ऐसे मरीजों के इलाज के लिए सीएमओ (कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर) की सबसे अधिक जरूरत रहती है। लेकिन, जीएमसी में सीएमओ के 12 में से 8 पद रिक्त हैं। इसका सीधा असर इमरजेंसी में इलाज करवाने आ रहे मरीजों पर पड़ रहा है। इसके अलावा, जीएमसी में एनेस्थीसिया, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जरी और गायनी में डॉक्टरों की खासी कमी है। यहां केवल कॉर्डियोलॉजिस्ट, ग्रेस्ट्रोलॉजिस्ट के ही सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टर हैं। अन्य सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों की डिमांड विभाग को भेजी गई है। अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए उच्चधिकारियों को लिखा गया है। जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।
पैरामेडिकल स्टाफ की भी कमी
जीएमसी में डॉक्टरों के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ की भी भारी कमी है। इसके अलावा, लैब टेक्नीशियन, एनेस्थीसिया टेक्नीशियन, डायलिसिस टेक्नीशियन और सर्जरी टेक्नीशियन की भी कमी है। अधिकारिक तौर पर उक्त पैरामेडिकल स्टाफ की 50 फीसदी कमी है, जबकि कई ऐसे पद हैं, जिन पर 30 फीसदी स्टाफ से काम चलाना पड़ रहा है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि एक साल में भर्ती प्रक्रिया पूरी होगी और जीएमसी में स्टाफ की कमी आड़े नहीं आएगी।
सीनियर रेजीडेंट भी हैं कम
महिला रोग, बाल रोग, एनेस्थीसिया और सर्जरी जैसे अहम विभागों में स्वीकृत प्रोफेसर के 23 पदों में से 11 खाली हैं। इसके अलावा, एसोसिएट प्रोफेसर के 33 में से 10 पद रिक्त हैं। वहीं, असिस्टेंट प्रोफेसर के 48 में से 12, सीनियर रेजीडेंट के 51 में से 25 और कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर के 12 में से 8 पद रिक्त हैं। कहा जाता है कि सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ होते हैं लेकिन जीएमसी में मेडिसन, एनेस्थीसिया, सर्जरी, बाल रोग विभाग में सीनियर रेजीडेंट की भारी कमी है।
नर्सिंग कॉलेज की पढ़ाई का जिम्मा भी जीएमसी कॉलेज स्टाफ के हवाले
कठुआ में नर्सिंग कॉलेज की पहले साल की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। यहां 60 विद्यार्थियों का दाखिला हो चुका है। लेकिन, फैकल्टी की भर्ती नहीं हो पाई। ऐसे में जीएमसी प्रशासन की ओर से जारी रोस्टर के हिसाब से जीएमसी स्टाफ को ही नर्सिंग कॉलेज में कक्षाएं लेनी पड़ती हैं।
-जिन विभागों में डॉक्टरों या स्टाफ की कमी है, उसके लिए उच्चाधिकारियों को लिखित में जानकारी दी गई है। कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया जारी है। नेफ्रालॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और पीडियाट्रिक विभाग के सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टरों की डिमांड भेजी गई है। अन्य विभागों में डॉक्टरों व स्टाफ की कमी जल्द दूर की जाएगी।
-डाॅ. सुरिंदर अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ