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जीएमसी कठुआ में अब मां और नवजात को मिलेगी क्रिटिकल केयर

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कठुआ। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मासूमों को लेकर परिजनों को अब जिले से बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। जीएमसी कठुआ के एसोसिएटेड अस्पताल में ही बेहतर और उचित चिकित्सा मुहैया कराई जाएगी। यहां बाल चिकित्सा आईसीयू के आठ बेड के अलावा अतिरिक्त 30 बेड का बाल चिकित्सा वार्ड, चार बेड का हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) और सात मेटरनल आईसीयू की संपूर्ण सुविधा अगले सप्ताह से शुरू होने जा रही है।
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जिले का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान होने के चलते दूरदराज इलाकों से यहां बच्चों के इलाज के लिए पहुंचने वाले परिजनों के लिए यह राहत की खबर है। जीएमसी कठुआ के शिशु रोग वार्ड में पीआईसीयू (प्रसव पूर्व चिकित्सा) इकाई बनाई गई है। इसके साथ ही जन्म के तुरंत बाद नवजात और मां दोनों को एक साथ देखभाल और उपचार एक ही जगह पर देने के लिए मेटरनल आईसीयू तैयार किया गया है। चार बेड के हाई डिपेंडेंसी यूनिट में अत्याधिक क्रिटिकल मामलों में उपचार दिया जाएगा।
जीएमसी कठुआ में औसतन 500 से अधिक नॉर्मल डिलीवरी और 250 से अधिक सिजेरियन सर्जरी हर महीने की जाती हैं। इन मामलों में कई बार शिशु और मां दोनों को एक साथ उपचार और देखभाल की जरूरत रहती है। ऐसे में इन मामलों को अब तक रेफर कर दिया जाता था।
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यही हाल छोटे बच्चों के लिए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं में भी था, जहां बच्चों को रेफर करने के अलावा कोई चारा नहीं बचता था। इन नई बनाई गई आईसीयू और एचडीयू में वेंटिलेटर सहित अन्य अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण स्थापित होंगे।
जीएमसी कठुआ में एक माह से 15 वर्ष तक के गंभीर बीमार बच्चों को अभी प्राथमिक उपचार प्रदान किया जाता रहा है। उनके लिए अलग से आईसीयू की सुविधा नहीं थी। स्वास्थ्य में सुधार होने पर इन्हें शिशु रोग वार्ड में शिफ्ट किया जाता है, लेकिन सुधार नहीं होने पर जीएमसी जम्मू रेफर कर दिया जाता है। इससे परिजनों को बच्चों के इलाज के लिए दूसरे शहरों का भटकना पड़ता है। जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में नई सुविधाओं से ऐसे मामलों से निपटने में मदद मिलेगी।
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जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में वेंटीलेटर से लैस पीआईसीयू, एचडीयू और मेटरनल आईसीयू के कुल 19 बेड अब उपलब्ध रहेंगे। इसके अलावा शिशु रोग वार्ड के 30 बेड भी उपलब्ध हैं। नई सुविधाओं के विस्तार से जिले में शिशु रोग के गंभीर मामलों से भी निपटने में मदद मिलेगी। इनमें चिकित्सक सहित स्टाफ की 24 घंटे तैनाती रहेगी। शिशु रोग वार्ड में मेटरनिटी विंग की तर्ज पर हाई डिपेंडेंसी यूनिट भी बनाई गई है। यह चार बेड की है। इस इकाई में भी गंभीर बीमार मासूमों को दाखिल किया जाएगा।
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डॉ. अंजलि नादिर भट्ट, प्रिंसिपल, जीएमसी कठुआ
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