एक तरफ स्वास्थ्य विभाग जहां स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान चलाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहा है। इससे चिराग तले अंधेरा वाली कहावत यहां के स्वास्थ्य विभाग पर चरितार्थ होती दिख रही है।
हीरानगर उपमंडल में सात प्राइमरी हेल्थ सेंटर (पीएचसी) और न्यू टाइप प्राइमरी हेल्थ सेंटर (एनटीपीएचसी) हैं लेकिन किसी में डॉक्टर की तैनाती नहीं है। सभी केंद्र कर्मचारियों के भरोसे संचालित किए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के तहत ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच कर दवाएं दी जा रही हैं। इससे तात्कालिक लाभ तो होगा, लेकिन स्थायी लाभ के लिए डॉक्टरों की तैनाती आवश्यक है, जिसके लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा। जबकि क्षेत्र के लोग स्वास्थ्य विभाग से लेकर जनप्रतिनिधियों तक स्वास्थ्य केंद्रों पर पद के अनुरूप डॉक्टरों की तैनाती की मांग वर्षों से करते आ रहे हैं।
लोग कहते हैं कि अब तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। अगर इन स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर हों तो लोग कभी भी इलाज के लिए परेशान नहीं होेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन बीमार होने पर लोगों को आसपास के अस्पतालों की तलाश करनी पड़ती है। नजदीक के कोई स्वास्थ्य केंद्र में डाॅक्टर के नहीं होने से लोगों को दूर-दराज के अस्पतालों में जाना मजबूरी है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग समेत जम्मू-कश्मीर सरकार और उपराज्यपाल से पीएचसी में डाॅक्टर की तैनाती की मांग की है।