जिला के दूरदराज और पहाड़ी इलाकों के स्कूलों विद्यार्थियाें का भविष्य भगवान के भरोसे ही है। मंगलवार को हट्ट में दौरे पर पहुंचे तहसीलदार ने जब इलाके के सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया तो हालत खुद बयां हो रही थी। प्राइमरी स्कूल कुडेरा पर जहां ताला लटक रहा था, वहीं गर्ल्स प्राइमरी स्कूल हट्टी में मिड डे मील ही नहीं बना था।
हैरानी की बात यह है कि यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले हदाट के सरकारी स्कूल में भी ऐसे ही मामलों को अमर उजाला ने उजागर किया था, जहां कई दिनों तक स्कूल पर ताला लटकता रहा। मंगलवार को हट्ट में गिरदावरी पड़ताल के लिए पहुंचे बसोहली के तहसीलदार जय सिंह ने बताया कि प्राइमरी स्कूल कुडेरा में ताला लटका हुआ था। न तो स्कूल में शिक्षक पहुंचे थे और न ही बच्चे। इसके बाद गर्ल्स प्राइमरी स्कूल पहुंचने पर पाया कि स्कूल में मिड डे मील बना ही नहीं है। ऐसे में शिक्षक भी कारण बता पाने में असमर्थ थे।
स्कूल के मैदान को देखकर साफ था कि मार्निंग एसेंबली से लेकर अन्य खेल गतिविधियां भी अंजाम नहीं दिया जा रहा था। हालांकि सरकारी हाई स्कूल हट्ट में दौरे में सब कुछ सामान्य पाया गया।
ग्यारह बच्चों के लिए तीन शिक्षक
एक ओर जहां जिले के विभिन्न सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर आए दिन लोग गुहार लगाते हैं, वहीं जिले के बसोहली विधानसभा क्षेत्र ऐसा है, जहां शिक्षा विभाग के तमाम इंतजाम धरे के धरे नजर आते हैं। आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बसोहली शिक्षा जोन में दर्जनों ऐसे स्कूल हैं, जहां न तो पूर्व में की गई प्रक्रिया में कम इनरोलमेंट वाले स्कूलों का विलय हुआ और न ही शिक्षकों की उचित युक्तिकरण। गर्ल्स प्राइमरी स्कूल हट्ट में भी कुछ ऐसा ही है।
स्कूल में मात्र ग्यारह बच्चे हैं, जबकि ऐसे कम इनरोलमेंट वाले स्कूलों का पिछले सत्र में ही शिक्षा विभाग द्वारा नजदीकी स्कूलों के साथ विलय कर दिया गया था। यही नहीं इस स्कूल में ग्यारह बच्चों को पढ़ाने के लिए तीन-तीन शिक्षक तैनात हैं।