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Kathua News: पहली बार सड़क संपर्क से जुड़ेगा बांजल,आंगन तक पहुंचेगी गाड़ी

Sun, 23 Mar 2025 01:16 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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बांजल से चला के बीच घोड़े, खच्चरों और पैदल सफर करते लोग। संवाद - फोटो : kathua
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लिंक सड़क के लिए नाबार्ड के तहत मिली मंजूरी, पांच हजार आबादी को होगा लाभ
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कठुआ। आजादी के सात दशक के बाद बांजल और आसपास की लगभग पांच हजार की आबादी पहली बार सड़क से जुड़ने जा रही है। अब वो दिन दूर नहीं जब दूर पैदल चलकर गाड़ी पकड़ने वाले इस क्षेत्र के लोगों के आंगन में गाड़ी पहुंच जाएगी। नाबार्ड के तहत चला से बांजल तक सड़क निर्माण के भेजे गए प्रपोजल को आंतरिक मंजूरी समिति ने हरी झंडी दिखा दी है।
लगभग 13 करोड़ की इस परियोजना के तहत छह किलोमीटर सड़क का निर्माण होगा। इसमें न सिर्फ बांजल बल्कि क्षेत्र का प्रसिद्ध जोड़ेयां माता मंदिर भी अब सड़क के काफी नजदीक हो जाएगा। जोडेयां माता यात्रा के दौरान बांजल को यात्रा का आधा पड़ाव माना जाता है ऐसे में साफ है कि जोडेयां माता की पैदल दूरी भी अब सड़क संपर्क मिलने के बाद आधी रह जाएगी। उधर, सड़क बांजल के साथ साथ बोडू, हरडू, कछीड़ के लोगों के लिए विकास की राह लेकर आएगी। अबतक इस इलाके के लोग पैदल या फिर खच्चरों के सहारे सफर करते थे। बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता था।
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क्षेत्र के प्रसिद्ध जोडेयां माता के दरबार में हर साल लाखों की तादाद में भक्त शीष नवाने पहुंचते हैं। जो अब आने वाले वर्ष में आधा पैदल सफर तय कर ही माता के भवन तक पहुंच जाएंगे।
विभाग के सहायक अभियंता करतार सिंह ने बताया कि नाबार्ड की मुंबई में आयोजित आंतरिक मंजूरी समिति ने इसके लिए फंड्स को मंजूरी दी है। प्रदेश सरकार की ओर से फंड्स उपलब्ध करवाए जाने के साथ ही इस काम को गति दी जाएगी। यह इस दूर दराज क्षेत्र के लोगों की लंबी मांग थी और सड़क से जुड़ने के बाद एक बड़ी आबादी को इसका लाभ मिलेगा। प्रसद्धि जोडेयां माता मंदिर का सफर भी आधा रह जाएगा।
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खद्दर किलोड़ को भी सरकार की इनायत का इंतजार


बनी से 12 से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित खद्दर किलोड़ के लोगों को भी सरकार की नजर ए इनायत का फिलहाल इंतजार है। क्षेत्र की आबादी ने सड़क संपर्क का जो सपना दशकों से संजोया है वो अब भी अधूरा है। ऐसे में यह इलाका विकास से तो पिछड़ा है ही, यहां की आबादी को सड़क मय्यसर न होने से मूलभूत सुविधाएं भी समय से उपलब्ध नहीं होती है। आज भी इलाके के लोगों को पालकी में डालकर अस्पताल तक पहुंचाया जाता है।
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