रठुआ में पानी ओर गंदगी से भरा एक बंकर। अमर उजाला
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हीरानगर। गोले के धमाके से बच्चे सहम जाते हैं। हम उन्हें क्या बताएं हमें भी कुछ नहीं सूझता। धमाकों के बाद बच्चों का रोना चिल्लाना हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि बॉर्डर पर रहकर हमने कौन सा पाप किया है। यह दर्द रठुआ निवासी सोमा देवी, जिनके घर की छत पर एक गोला गिरा है ने बयां किया है। उन्होंने बताया कि जोरदार धमाका हुआ और घर के सारे लोग सहम गए।
बंकर घर से दूरी पर था, इसलिए एक ही कमरे में नीचे बिस्तर लगा कर सभी लेट गए। बच्चों ने चीखना-चिल्लाना शुरू कर दिया। हर धमाके के बाद बच्चे जोर से चिल्लाते। बच्चों को धमाकों की आवाज न सुनाई दे जिसके लिए टीवी की आवाज तेज कर दी और सर्दी के बावजूद फर्राटा पंखा चला दिया। हम नाकाम रहे और बच्चे रात भर रोते चिल्लाते रहे। इस तरह की जिंदगी से अब हम परेशान हो चुके हैं। हमें किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए, जहां शांति से रह सकें और बच्चे शांत वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें।
कुछ समय के लिए भी कमरे में ठहरते तो मारे जाते
जैसे ही हम खाना खाकर बंकर में जाने लगे उसी वक्त करीब 8:40 बजे एक गोला घर की छत को भेद कर कमरे में लगे बिस्तर के नजदीक आकर फटा। गनीमत यह रही कि बच्चे घर पर नहीं थे और हम भी बाहर निकल चुके थे। कुछ समय के लिए भी अगर इस कमरे में रुकते तो पूरा परिवार खत्म हो जाता। हालांकी गत कई दिन से इसी कमरे में रोजाना सो रहे थे। ऐसे हालात से परेशान हो चुके हैं। खेतीबाड़ी प्रभावित होती जा रही है। सरकार से मांग हैं कि सुरक्षित स्थान पर हमें बसाया जाए। ऐसी जिंदगी का क्या करेंगे। जिसमें दिन को काम और रातें सहम कर गुजारनी पड़े।
बच्चों की शिक्षा को लेकर बेहद चिंता है
गोलाबारी के बाद सीमावर्ती लोगों को बच्चों की शिक्षा की चिंता भी अब सताने लगी है। क्योंकि इस इलाके के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे कक्षाओं में दिनभर सहमे रहते हैं। जो बच्चे गांव से बाहर किसी निजी स्कूल में पढ़ते हैं उन्हें लाने ले जाने वाले वाली स्कूल बस के चालकों ने आनाकानी शुरू कर दी। अगर स्कूली बसें नहीं आएंगी तो पढ़ाई प्रभावित होगी। वहीं, हमारी मेहनत पर भी पानी फिर जाएगा।
हीरानगर सेक्टर के सीमावर्ती रठुआ गांव की सोमा देवी पाकिस्तानी गोलाबारी के बाद दर्द को बयां करती ?- फोटो : KATHUA
हीरानगर के रठुआ गांव के पास गिरा मोर्टार शेल। अमर उजाला- फोटो : KATHUA