मरोली औद्योगिक क्षेत्र में स्थित पेपर मिल में आग लगने के दौरान वहां पर काम कर रहे मजदूरों की जान बाल बाल बच गई। सही मौके पर यूनिट से बाहर निकलने और फायर टेंडर के मौके पर पहुंचने के कारण कोई जानी नुकसान नहीं हुआ।
मिल या फिर इकाइयों में आग से निपटने के इंतजामों की पोल खुल गई। मौके पर पहुंचे लखनपुर थाना प्रभारी ने भी मिल के कार्यकारी प्रबंधक की जमकर क्लास ली।
थाना प्रभारी केडी भगत ने बताया कि शुक्रवार को साढ़े बारह बजे के करीब जब यूनिट में आग लगी तो उस समय करीब दो दर्जन मजदूर अंदर काम कर रहे थे।
चिंगारी को समय पर नहीं देखा जाता और मजदूर मौके से नहीं भागते तो किसी की जान भी जा सकती थी। उन्होंने प्रबंधक को फटकार लगाते हुए कहा कि आग से निपटने के इंतजाम किए बिना ही उन्होंने यूनिट का कैसे चालू कर दिया।
प्रभारी के अनुसार यूनिट में न तो आगे बुझाने के लिए साधन उपलब्ध थे और न ही आसपास अन्य किसी प्रकार का कोई इंतजाम जिससे आग को बुझाया जा सके।
वहीं मजदूरों ने बताया कि यूनिट के साथ पूरी मिल में आने और जाने के लिए केवल एक ही द्वार है। इसके अतिरिक्त मिल में आपातकालीन द्वार भी नदारद है।
जान जोखिम में डालकर ही उन्हें काम करना पड़ता है। गौरतलब है कि किसी भी औद्योगिक इकाई को आग से निपटने के लिए प्रर्याप्त इंतजाम करने के बाद दमकल विभाग से एनओसी लेना पड़ता है और समय पर उसे रिन्यू भी करवाना पड़ता है।
आग न बुझाने के इंतजाम में केवल एक ही पेपर मिल शामिल नहीं है। जिला के तमाम औद्योगिक क्षेत्र नियमों को ताक पर रखकर यूनिट चला रहे हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि आग लगने के बाद भी इंतजाम नहीं किए जाते हैं। उस पर जिला प्रशासन और संबंधित विभाग भी चुप्पी साधे हुए है।
कुछ महीने पूर्व सीटीएम में भी आग लगने के कारण करोड़ों का नुकसान हुआ था लेकिन इसके बावजूद भी विभाग ने इंतजामों को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई।