मास्क्वीटो क्वाइल बनाने वाली औद्योगिक इकाई में 13 दिन बाद शुक्रवार को अचानक फिर भयंकर आग लग गई। कारखाने से उठती आग की लपटों से अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी अफरातफरी का माहौल बन गया।
आनन-फानन में फायर एंड इमरजेंसी विभाग के फायर टेंडर राहत और बचाव कार्य में जुट गए। देर रात तक आग पर काबू पाने में सफलता नहीं मिल पाई थी। आग की लपटों से आसपास भी खतरा मंडरा रहा था। सात नवंबर को तड़के इसी औद्योगिक इकाई में भीषण आग लगी थी।
शुक्रवार को फैक्ट्री में मलबे के ढेर के नीचे से फिर आग भड़क गई। गौरतलब है कि सात नवंबर को कारखाने में लगी आग इतनी प्रचंड थी कि कठुआ सहित हीरानगर, सांबा और यहां तक कि पंजाब से भी फायर टेंडर मंगवाने पड़े थे।
सात नवंबर तड़के से देर रात तक व्यापक अभियान चलाने के बाद काबू पर काबू पाया गया था। इसके बाद से घटनास्थल को अपने हाल पर छोड़ दिया गया। औद्योगिक इकाई के प्रबंधकों के अनुसार सात नवंबर को लगी भीषण आग से हुए नुकसान का सर्वेक्षण करवाया जा रहा था।
इस प्रक्रिया के पूरा होने तक मलबे से छेड़छाड़ करने से परहेज किया गया। शुक्रवार को इसी मलबे के ढेर के नीचे से आग फिर भड़क गई। आग की लपटें दिखते ही फायर एंड इमरजेंसी विभाग को सूचित कर दिया गया। कठुआ स्थित दमकल विभाग कार्यालय से फायर टेंडर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए।
देर शाम तक फायर टेंडर कई दफा आग बुझाने का प्रयास कर चुके थे, लेकिन लपटों को पूरी तरह से शांत करने में सफलता नहीं मिल पाई। अभियान में जुटे कर्मियों के अनुसार आग भीतर ही भीतर सुलगते रहने की संभावना है, जिसकी वजह से फिर आग भड़क गई।
बहरहाल आग पर पूरी तरह से काबू पाने के लिए अभियान जारी है। उधर मास्क्वीटो क्वाइल बनाने वाली इकाई के पास स्थित अन्य इकाइयों को भी खतरा हो गया है।