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Kathua News: औद्योगिक कबाड़ के गोदाम में लगी आग, 11 घंटे तक उठती रहीं लपटें

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आग की लपटों के बीच अपनी जान की परवाह किए बिना आग को फैलने से रोकने का प्रयास करते हुए युवक
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मंगलवार की रात ढाई बजे मची अफरातफरी, मजदूरों के 15 आशियाने जलकर राख
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सोए बच्चों को समय रहते बाहर निकालकर बचाई गई जान, गोदाम में प्लास्टिक होने की वजह से भड़की आग


संवाद न्यूज एजेंसी

कठुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे चक गोटा क्षेत्र स्थित औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले कबाड़ के गोदाम में मंगलवार की आधी रात भीषण आग लग गई। आग की लपटें इतनी विकराल थीं कि देखते ही देखते गोदाम में रखा लाखों रुपये का प्लास्टिक कबाड़ जलकर राख हो गया। गोदाम परिसर में बने 15 आशियाने जलकर राख हो गए। मजदूरों के घरेलू सामान, कपड़े, बिस्तर, राशन और अन्य जरूरी वस्तुएं पूरी तरह जल गए।
परिसर में काम कूड़ा-करकट बीनने वाले मजदूरों ने बताया कि मंगलवार की रात करीब ढाई बजे गोदाम में अचानक आग भड़क उठी। उस समय अधिकांश मजदूर और उनके बच्चे गहरी नींद में सो रहे थे। आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। इसे देख मौके पर अफरातफरी मच गई। कई छोटे बच्चे झोपड़ियों में सो रहे थे, जिन्हें समय रहते बाहर निकाल लिया गया। अनीता देवी ने बताया कि वह बिहार की रहने वाली हैं। पिछले छह सालों से यहां रह रही हैं। उसने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि उन्हें अपने आशियाने में रखा सामान निकालने का मौका ही नहीं मिला, लेकिन गनीमत रही कि किसी जान माल की क्षति नहीं हुई।
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पीड़ित सूरज कुमार ने बताया कि गोदाम में प्लास्टिक होने की वजह से आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उनकी हिम्मत ही नहीं पड़ी कि कूड़ा-करकट ढोने वाली मोटरसाइकिल गाड़ी को बाहर निकाल सके। उन्होंने बताया कि 15 झुग्गियों में करीब 30 परिवार रहते थे। सूरज कुमार ने बताया कि बच्चों को खड्ड के किनारे बैठाकर सारे मजदूर पूरी रात बाल्टियों और पाइपों से आग पर काबू पाने में जुटे रहे, फिर भी कोई भी सामान नहीं बच सका।
पास के अन्य गोदाम के मालिक सतनाम ने बताया कि आग कैसे लगी, इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है, लेकिन गनीमत रही कि पास के और दो बड़े गोदामों तक आग नहीं पहुंची। नहीं तो नुकसान और अधिक हो जाता। बेकाबू आग की लपटें देखकर लोगों ने अग्निशमन विभाग को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कई फायर टेंडर वाहनों की मदद से 11 घंटे बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक गोदाम में सारा सामान राख हो चुका था।
अग्निशमन विभाग के जिला प्रभारी मोहिंद्र सिंह ने बताया कि मंगलवार की रात ढाई और तीन बजे के बीच आग लगी थी। जैसे ही सूचना मिली, पहला फायर टेंडर वाहन 5 बजे घटना स्थल पर पहुंच गया। आग की लपटों को देख तीन और वाहनों को मौके पर भेजा गया। इसमें एक वाहन को हीरानगर से बुलाना पड़ा। 11 घंटे की मशक्कत के बाद ही आग पर काबू पाया गया। उनके मुताबिक, करीब पांच लाख से ज्यादा मूल्य के सामान जलकर राख हो गया है। 15 से ज्यादा झुग्गियां और उसमें रखे सामान राख हो गए।


पिछले 24 घंटे में शहर और उसके आसपास चार जगह लगी आग

मंगलवार को दिन ढलने के बाद शहर और उसके आसपास के चार स्थानों पर एक साथ आग लगने की घटनाएं सामने आईं। देर रात तक फायर टेंडर वाहन खरोट के जंगल में लगी आग पर काबू पाने में लगे रहे। इसी बीच चकगोटा स्थित प्लास्टिक के गोदाम में आग भड़क गई। इसी बीच जंगलोट और मेहताबपुर में जंगल में आग बुझाने के लिए दमकल विभाग के कर्मचारी जुटे हुए थे कि बुधवार की दोपहर शहर के बीचोबीच पुलिस लाइन स्थित खाली तीन प्लाटों में आग लग गई, जिसे भारी मशक्कत के बाद काबू पाया गया।
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हीरानगर से मंगवाना पड़ा अतिरिक्त फायर टेंडर

एक के बाद एक आग की घटनाओं और चक गोटा गोदाम में लगी भीषण आग को देखते हुए अग्निशमन विभाग को हीरानगर से अतिरिक्त फायर टेंडर वाहन की मदद लेनी पड़ी। अधिकारियों के अनुसार, प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री के कारण आग बार-बार भड़क रही थी। इसके चलते, आग पर पूरी तरह काबू पाने में समय लग गया। संयुक्त प्रयासों के बाद आखिरकार 11 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
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