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बंदरों के आतंक से किसानों ने बंद की खेती

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हीरानगर। कुछ दिन पहले दो दिन तक लगातार हुई बारिश के बाद जहां एक तरफ सीमावर्ती इलाके के किसान धान की रोपाई में जुट गए हैं, वहीं दूसरी तरफ कंडी के किसान खाली पड़े खेतों को देखकर परेशान हो रहे हैं। दरअसल इस इलाके में बंदरों के आतंक के चलते किसान खेती से हाथ पीछे कर चुके हैं।
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कई बार यह किसान स्थानीय प्रशासन और सरकार से गुहार लगा चुके हैं कि यहां बंदरों के आतंक को खत्म करने के लिए काम किया जाए। इसके बाद भी आज तक उनकी इस मांग पर किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई है। बीडीसी चेयरमैन सुदेश शर्मा ने कहा कंडी क्षेत्र में बंदरों के आतंक के चलते ज्यादातर जमीनें कई सालों से खाली पड़ी हुई हैं। किसानों को न चाहते हुए यह जमीनें खाली छोड़नी पड़ी हैं। इसकी वजह से उनकी आय का कोई साधन नहीं रहा है और वह आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे हैं।
उन्होंने कहा इस क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं पर भी सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। यहां के युवाओं के लिए न तो रोजगार है और न ही यह युवा खेतों में काम कर सकते हैं। रमेश शर्मा ने कहा कुछ साल पहले खेतों में गेहूं, मक्की की अच्छी पैदावार होती थी। लेकिन जब से इस इलाके में बंदरों का आतंक शुरू हुआ है कोई भी सफल नहीं हो रही है। जो भी फसल किसान लगाते हैं उसे बंदर बर्बाद कर देते हैं। अब तो बंदर घर के आंगन में लगाई हुई सब्जियों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। कंडी के किसानों ने सरकार से मांग की है कि इस इलाके में बंदरों के आतंक को खत्म करने की योजना बनाई जाए। इसी के साथ किसानों को खेती के लिए सरकारी योजनाओं को प्राथमिकता पर लाभ दिया जाए।
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