अनुकूल मौसम के बीच जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सदियों से पनप रही जड़ी-बूटियों को देश-दुनिया के बाजार में लाने का वक्त आ गया है। बायोटेक पार्क से जहां इन दिनों भद्रवाह में लैवेंडर की खेती का सफल ट्रायल हुआ है, वहीं वो दिन दूर नहीं जब कठुआ के मल्हार, बसोहली और बनी, डुग्गन में भी किसानों की आय बढ़ाकर यह एक बड़ी क्रांति लाने वाला है।
आईआईआईएम, जम्मू की ओर से पार्क में नियुक्त ओएसडी डॉ. जबीर अहमद ने बताया कि लैवेंडर आयल पहले कश्मीर में ही पैदा होता था। आईआईआईएम के हस्तक्षेप के बाद इसे भद्रवाह में लगाया गया। किसान जहां मक्की से दो हजार रुपये कमाते थे, अब उतनी ही मेहनत कर पंद्रह हजार तक कमा रहे हैं। बनी-बसोहली के इलाकों में वहां के मौसम और तापमान के अनुरूप किसान वहां भी औषधीय और खूशबुदार पौधों की पैदावार कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
बायोटेक पार्क में होंगी ये सुविधाएं
- एक्सट्रैक्शन-जिसमें पॉयलट स्केल पौधों से एक्सट्रैक्शन की जाएगी
- कंपाउंड फर्मेंटेशन-एंजाइम या अन्य मॉलिक्यूल पर काम होगा
- सेंट्रल इंस्ट्रूमेंटेशन-जिसमें वैज्ञानिक और केमिकल स्टैंडर्डाइजेशन किया जाएगा
- एनालिटिकल लैब सुविधा
- ट्रेनिंग और कांफ्रेंस हॉल
- बिजनेस विकास ग्रुप के लिए मीटिंग रूम
- कैफेटेरिया, बैंक और डिस्पेंसरी
यह उत्तर भारत का पहला बायोटेक पार्क जम्मू-कश्मीर में अनुसंधान, रोजगार और कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण गेम चेंजर बनने जा रहा है। इससे विशेष रूप से पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं के ज्ञान और उनकी मेहनत को पंख लगेंगे। - डॉ. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय राज्यमंत्री