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सरकारी की कर्मचारी विरोधी नीति पर जताया रोष

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कठुआ में अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन करते जलशक्ति विभाग के कर्मचारी। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। सरकारी की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों ने कठुआ स्थित विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय के समक्ष अपना रोष प्रदर्शन किया। पीएचई एंप्लाइज यूनाइटेड फ्रंट के बैनर तले जमा हुए कर्मियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार से कर्मचारियों का शोषण बंद किए जाने की मांग की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी के अगर वित्तीय वर्ष के अंत तक कर्मचारियों की मांगों पर गौर नहीं किया गया। तो वह लोग इसके खिलाफ आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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इस मौके पर फ्रंट के जिला चेयरमैन हरबंस लाल ने कहा कि एसआरओ 59 और एसआरओ 149 की रिकवरी के जो आदेश विभाग के अधिकारियों द्वारा दिए जा रहे हैं। वह सरासर सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना है। उन्होंने कहा कि जब तक यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। तब तक कोई भी अधिकारी इस संबंध में किसी भी तरह की रिकवरी के आदेश नहीं जारी कर सकता। उन्होंने विभाग में कार्यरत कर्मचारियों की की पदोन्नति के लिए डीपीसी कमेटी गठित करने के साथ-साथ अस्थाई कर्मचारियों का पिछले 70 महीनों का बकाया वेतन जारी करने की मांग की। वहीं, सेवानिवृत्त हो जाने वाले अस्थाई कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन एकमुश्त जारी करने, विभाग में 7 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके सभी अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने की मांग उठाई।
फ्रंट के सचिव राकेश कुमार ने उपराज्यपाल से मानवता के आधार पर विभाग के अस्थायी कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने की अपील करते हुए कहा कि दशकों से विभाग में अपनी सेवा देने वाले अस्थायी कर्मचारी जिनके कारण ही जल आपूर्ति की पूरी व्यवस्था का संचालन होता है। उन्हें उनका हक दिया जाए ताकि वह और उत्साह के साथ अपनी सेवाएं दे सके। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग में काम करने वाले कर्मचारी पिछले कई सालों से इंसाफ की इस जद्दोजहद को चला रहे हैं। लिहाजा सरकार समय रहते कर्मचारियों की वर्षों से लंबित पड़ी मांगों को जल्द पूरा करें। प्रदर्शन में रमेश गुप्ता, जसवंत राज, प्रिंस सिंह, गोपाल सिंह, विजय कुमार, जोगिंदर पाल, अश्विनी कुमार, शिवराम, ओमप्रकाश, दारा नाथ, शमशेर सिंह आदि शामिल रहे।
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