भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण हालात हों या चुनाव की तैयारियां या फिर आतंकी घुसपैठ। अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है।
दो महीनों से भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है। गुरुवार की घटना के बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
तनावपूर्ण हालात में गोलाबारी के बाद ग्रामीण विस्थापित शिविरों से अपने घरों को लौटे ही थे कि चुनावी गहमागहमी को देखते हुए सुरक्षा का पहरा बढ़ा दिया गया।
ऐसे में तारबंदी के उस पार आवाजाही करना ग्रामीणों के लिए मुश्किल हो गया। अरनिया में घुसपैठ और आतंकियों से मुठभेड़ के बाद हालात और भी बदहाल हो गए।
अरनिया सेक्टर से गुरुवार को आतंकी घुसपैठ की खबर मिलते ही हीरानगर सब डिविजन की अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा बढ़ा दी गई।
ऐसे में न तो किसानों को तारबंदी के उस पार जाने की अनुमति मिल सकी और ना ही वह सामान्य दिनों की तरह आवाजाही कर सके।
बॉर्डर यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारत भूषण ने बताया कि भारत पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अक्तूबर से हालात खराब हो गए। न तो किसान समय पर खरीफ सीजन की फसलों की कटाई कर सके और ना ही अब रबी सीजन की खेती कर पा रहे हैं।
चक चंगा गांव के लोगों ने अपना जोखिम उठाकर तारबंदी के उस पार फसल लगाई है लेकिन चुनावी हलचल के बीच सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने की वजह से खेती करना अब मुमकिन नहीं हो पा रहा है।
भारत भूषण सहित यूनियन अध्यक्ष नानक चंद, रतन चंद, ईश्वर दास और जीत राम ने बताया कि अरनिया में घुसपैठ से सीमावर्ती इलाकों में फिर से दहशत का माहौल है। तनावपूर्ण हालात की वजह से ग्रामीणों का जीवन फिर से मुश्किल में पड़ गया है।
उल्लेखनीय है कि कठुआ जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे पांच किलोमीटर के दायरे में कुल 57 गांव हैं। सीमा पर तनावपूर्ण हालात होते ही इन गांवों में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से असर पड़ता है।