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Kathua News: जीएमसी में एंडोस्कोपी की सुविधा एक साल से ठप, ढीली हो रही जेब

Sat, 03 May 2025 12:31 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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- लोगों को निजी लैब में खर्चने पड़ रहे छह हजार रुपये
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-मशीनें मौजूद पर डाॅक्टर नहीं होने से लोग परेशान


कठुआ। जीएमसी अस्पताल में एक साल से एंडोस्कोपी की सुविधा बंद पड़ी है। एक साल पहले जब जीएमसी में मशीनें इंस्टाल हुई थी तो जीएमसी प्रबंधन ने दावा किया था कि इस नई सुविधा से जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में उपचार के लिए आने वाले लोगों को मिलने वाली सुविधा बढ़ेगी। मगर सुविधा शुरू होने के चंद दिनों के बाद ही ठप हो गई है।

अस्पताल में गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डाॅक्टर न होने से लोगों को निजी अस्पतालों या लैब में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। ऐसे में जिलावासी जीएमसी में पेट, खाने की नली, छोटी और बड़ी आंत, आमाशय, लिवर और पेंक्रियाज से जुड़ी बीमारियों की जांच जम्मू जीएमसी या निजी अस्पतालों से करवाने को मजबूर हैं।
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बता दें कि जीएमसी कठुआ में अस्पताल की ओपीडी एवं इमरजेंसी में नगर समेत आसपास के गांवों से पेट से जुड़ी बीमारियों के मरीज आते हैं। उनमें खाने की नली, पित्ते की पथरी, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत और पेंक्रियाज से से पीड़ित मरीज होते हैं। संवाद

100 से 150 रुपये में हो सकती है जांच
अस्पताल में डॉक्टर न होने के कारण एंडोस्कोपी के लिए जिला के लोगों को या तो जीएमसी जम्मू या निजी अस्पतालों में 5 से 6 हजार रुपये खर्च कर जांच करवानी पड़ती है। अगर, जीएमसी में यह सुविधा नागरिकों को मिले तो 100 से 150 रुपये में यह सुविधा मिल सकती है। जीएमसी प्रबंधन के मुताबिक आयुष्मान कार्ड धारकों को यही सुविधा मुफ्त में मिल सकती है। इससे स्थानीय लोगों के समय की बचत भी होगी। जीएमसी ने एंडोस्कोपी और एक कोलोनोस्कोपी मशीन भी मंगवाई है। बता दें, निजी अस्पतालों में कोलोनोस्कोपी जांच के लिए 3-4 हजार रुपये और एंडोस्कोपी जांच के लिए 5-6 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
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कोटएक साल पहले एंडोस्कोपी और कोलोनोस्कोपी जांच के लिए मशीनें आई थी। मशीनों का सेटअप लग चुका है। एक स्थायी स्पेशलिस्ट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डाॅ. सुशील शर्मा भी तैनात किए गए थे। इस मशीन से मरीजों की जांच होनी थी। मगर, डॉक्टर ने इस्तीफा दे दिया। इस बारे में उच्चाधिकारियों को भी सूचित किया गया है, जबकि जीएमसी कठुआ में डॉक्टरों की कमी के कारण लोगों की परेशानी को स्थानीय विधायक डॉ. भारत भूषण भी विधानसभा में उठा चुके हैं। पेट की समस्या से ग्रसित 100 मरीजों की ओपीडी होती थी, जिसमें 5 से 8 मरीजाें को जांच की जरूरत होती थी।
- सुरेंद्र अत्री, प्रिंसिपल जीएमसी कठुआ
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