10 साल पहले युवक ने कराया था कॉर्निया प्रत्यारोपण, सड़क हादसे में कॉर्निया जोड़ वाले हिस्से से हो गया था अलग
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के नेत्र रोग विभाग के चिकित्सकों ने 10 साल पुराने कॉर्निया प्रत्यारोपण का ऑपरेशन कर युवक की आंख की रोशनी बचाने में सफलता हासिल की है। जीएमसी के प्रधानाचार्य ने कहा कि यह उपलब्धि संस्थान में उपलब्ध आधुनिक नेत्र चिकित्सा सुविधाओं, त्वरित आपातकालीन सेवाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम की दक्षता का प्रमाण है।
बता दें कि 28 वर्षीय युवक को सड़क दुर्घटना में आंख पर गंभीर चोट लगी। उसे जीएमसी कठुआ के नेत्र रोग विभाग में लाया गया। जांच के बाद उसकी आंख की लालिमा और दृष्टि में कमी पाई गई। डॉक्टरों की टीम ने जांच के दौरान पाया कि मरीज ट्रॉमेटिक डिहिसेंस ऑफ प्रीवियस कॉर्नियल ग्राफ्ट जैसी दुर्लभ और दृष्टि के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति से जूझ रहा है। मरीज का लगभग 10 वर्ष पूर्व कॉर्निया प्रत्यारोपण (पैनेट्रेटिंग केराटोप्लास्टी) किया गया था और हादसे के कारण प्रत्यारोपित कॉर्निया अपने जोड़ वाले हिस्से से अलग हो गया था। इससे आंख की संरचना और दृष्टि दोनों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था।
इसकी गंभीरता को देखते हुए नेत्र रोग विभाग की टीम ने आपातकालीन सर्जरी का निर्णय लिया। सर्जरी का नेतृत्व डॉ. पलक गुप्ता (सहायक प्रोफेसर) ने किया। डॉ. सुनीत कौर (सीनियर रेजिडेंट) और डॉ. आकिब (जूनियर रेजिडेंट) ने उनका सहयोग किया। ऑपरेशन के बाद आंख की संरचनात्मक मजबूती और दृष्टि को सुरक्षित रखने के लिए 10 इंटरप्टेड 10-0 नायलॉन टांके लगाए गए। चिकित्सकों ने बताया कि यह ऑपरेशन अत्यंत जटिल था लेकिन समय रहते सर्जरी होने से मरीज की आंख की रोशनी बच गई। इस उपलब्धि के लिए जीएमसी प्रधानाचार्य डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री और नेत्र रोग विभाग की विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रियंका सूदनी की पूरी टीम की सराहना की है।