कठुआ। शाहपुर कंडी बांध से भले ही दशकों पुराने समझौते के अनुसार जम्मू कश्मीर को हक का पानी मिलना शुरू हो गया हो लेकिन जम्मू कश्मीर की नहरों की क्षमता अब भी एक बड़ी चुनौती है। राष्ट्रीय महत्व की शाहपुर कंडी परियोजना से जम्मू-कश्मीर के हिस्से में सिंचाई के लिए विभाग ने भी मंथन शुरू कर दिया है। आपदा से नहरों को हुए नुकसान और नहर की खस्ताहालत के चलते अब तक केवल डेढ़ सौ क्यूसेक तक ही पानी सिंचई के लिए ही शाहपुर कंडी बांध से लिया जा रहा था लेकिन अगले गर्मी से पहले नहर की दशा सुधारने और भविष्य की योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए काम शुरू होने जा रहा है।
इस साल जनवरी में शुरू होने वाले नहर बंदी के समय इनकी बड़े स्तर पर मरम्मत की तैयारी है। विभाग की कोशिश है कि अपर रावी तवी नहर से तीन से चार सौ क्यूसेक तक पानी अगले सीजन में उठाया जाए और नहर के आखिरी छोर तक पहुंचाया जाए। लगभग 16 हजार हेक्टेयर कंडी के क्षेत्र की सिंचाई करने वाली रावी तवी नहर बसंतपुर से उज्ज पुल तक मरम्मत के अधीन लाई जाएगी। इसके लिए मुख्य नहर में एक्वडक्ट से लेकर सायफन की सफाई, मरम्मत के अलावा नहर के कमजोर हिस्सों की मरम्मत का भी काम किया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में निधार्रित कार्य इस बार दो करोड़ 61 लाख की राशि के हैं।
इस साल भारी बारिश की वजह से नहर के कई हिस्सों को क्षति पहुंची थी वहीं चार दशक पुरानी नहर के कई हिस्से कमजोर हो चुके हैं। ऐसे में निधार्रित कार्यों से सिंचाई व्यवस्था में कुछ हद तक सुधार होने की उम्मीद है।
अधीक्षण अभियंता ने कठुआ जिले का किया दौरा
कठुआ। वीरवार को सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधीक्षण अभियंता हरि कृष्ण कौल ने कठुआ जिले का दौरा किया। शाहपुर कंडी बांध से रावी दरिया के मिल रहे पानी का अधिक से अधिक क्षमता में इस्तेमाल किया जा सके, इसके लिए उन्होंने नहर के कई जोखिम भरे हिस्सों का मौके पर जाकर जायजा लिया।
बसंतपुर और लखनपुर से लिफ्ट सिंचाई योजना के बंद होने के बाद विभाग अब ग्रेविटी से मिल रहे रावी के पानी का अगले सीजन तक कम से कम 500 क्यूसेक क्षमता में इस्तेमाल करने के लिए योजना बना रहा है। रावी तवी सिंचाई विभाग कठुआ के कार्यकारी अभियंता सुमेश हंगलु ने बताया कि पंजाब से अब रावी दरिया का पानी ग्रेविटी के जरिया मिल रहा है। लेकिन जम्मू कश्मीर के हिस्से में 1150 क्यूसेक तक पानी का इस्तेमाल किया जाए इसके लिए नहरों की दशा का सही होना जरूरी है। ऐसे में वित्त आयुक्त और मुख्य अभियंता के निर्देश पर अधीक्षण अभियंता ने कठुआ जिले का दौरा किया है। उन्होंने करयाली एक्वडक्ट, बडनी टू सायफन, दन्ना, मग्गर खड्ड, पाटी, लखनपुर, जंगलोट सायफन देखे। इसके अलावा कठेरा, ठनून और बरवाल में भी नहर की स्थिति का जायजा लिया है। अधिकारी ने बताया कि बसंतपुर से उज्ज तक नहर की दशा सुधारने के लिए विभाग के तक्नीकी स्टॉफ से योजना बनाकर सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश कैपेक्स बजट से इस वित्तीय वर्ष में होने वाले कार्यों के अलावा नहर की दशा सुधारने के लिए प्रयास किए जाएंगे ताकि कम से कम 500 क्यूसेक तक पानी जम्मू कश्मीर के कठुआ और सांबा जिले को अगले सीजन तक मिल सके। उन्होंने बताया कि इसके लिए इस साल डिसिल्टिंग का काम भी नहर बंदी के समय किया जाएगा। नहर के कमजोर हिस्सों की पहचान कर उनकी मरम्मत करवाने से पानी किसानों को अंतिम छोर तक और कम समय में सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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