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समस्याओं का गढ़ बना हुआ है शहर का वार्ड 17

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कठुआ। शहर के वार्डों में अब तक पानी, बिजली, गलियों, पानी की निकासी के साथ साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह से व्यवस्थित नहीं हो पाई हैं। स्थानीय लोगों को इन सुविधाओं के बहाल होने का इंतजार है। शहर के वार्ड 17 में रहने वाले लोग भी इससे अछूते नहीं। बढ़ती गर्मी के साथ वार्ड में रहने वाली करीब तीन हजार की आबादी की मुख्य समस्या इस समय पेयजल है।
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वार्ड में 50 साल पहले लगी पाइप लाइनें लोगों की प्यास नहीं बुझा पा रही हैं। इसके अलावा वार्ड की 50 प्रतिशत आबादी को पक्की गली नहीं मिल पाई हैं। पानी की निकासी के लिए अगर कहीं नाली और नाले की व्यवस्था है तो उसकी हालत जर्जर है, और सफाई का तो नामोनिशान नहीं। सार्वजनिक स्थानों पर लगे कचरे के ढेर लोगों को बदतर हालात में जीने को मजबूर किए हुए हैं। क्योंकि, बार-बार मांग किए जाने के बाद भी संबंधित विभाग इन समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहे।
क्या कहते है लोग
वार्ड में गंदे पानी की निकासी के लिए जितनी भी नालियों का निर्माण हुआ, वह सभी खुली हुई हैं। कई नालियों की हालत तो ऐसी है कि पता ही नहीं चलता है कि यहां कभी नालियों का निर्माण हुआ भी था। उनकी सफाई का भी कोई प्रबंध नहीं। ऐसी हालत में नालियों से निकलकर गलियों में गंदा पानी बहना आम है। बरसात के दिनों में स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है।
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- सतपाल, स्थानीय
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वर्ष 2005 से नगर परिषद के अधीन हुए वार्ड में सफाई की आज तक व्यवस्था नहीं हो पाई है। लोगों को अपने घरों के साथ गलियों की सफाई करनी पड़ती है। कचरा उठाने का भी प्रबंध नगर परिषद ने नहीं किया। लोग चाहे जितनी सफाई कर लें, गंदगी वैसी ही बनी रहती है। सफाई के नाम पर लगे डस्टबिन ओवरलोड हो चुके हैं। उनसे गिरने वाला कचरा वार्ड की सूरत खराब कर रहा है।
- त्रिलोक सिंह, स्थानीय
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वार्ड में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जलशक्ति विभाग गंभीर नहीं है। यहां करीब 50 वर्ष पूर्व लगी पुरानी पाइपलाइनों से वार्ड की बढ़ी हुई आबादी को पर्याप्त पानी नहीं मिलता। हालत यह है कि वार्ड में तीन से चार दिन के बाद जब पानी आता है तो उसका प्रेशर इतना कम होता है कि मात्र एक-दो बाल्टी पानी ही भर पाता है। वार्ड में लगे वाल्व से हर समय लीक होता पानी ठीक करने के लिए विभाग के पास कोई प्रावधान नहीं। ऐसा लगता है कि विभाग ने वार्ड में पानी के कनेक्शन स्थानीय लोगों से सिर्फ राजस्व वसूलने के लिए लगाए हैं। वार्ड में सैकड़ों ऐसे घर हैं जहां उनके नलों से पानी की बूंद भी नहीं टपकती।
-कुलजीत कुमार, स्थानीय
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वैसे तो वार्ड में बिजली, पानी, सफाई, आदि समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। लेकिन, इनमें पेयजल संकट और सफाई सबसे ज्यादा प्रमुख हैं। वार्ड में रहने वाली 60 प्रतिशत आबादी आर्थिक रूप से पिछड़े तबके की है। वह अपने भरण-पोषण की चिंता में हमेशा व्यस्त रहती है और समस्याओं से सबसे ज्यादा ग्रस्त होने के बावजूद कभी आवाज नहीं उठा पाती। इसके कारण न प्रशासनिक अधिकारियों और न ही जनप्रतिनिधियों का उनकी समस्याओं की ओर ध्यान जाता है। ऐसे हालात के कारण शहर में रहने के बावजूद लोगों को बदहाल जीवन गुजारना पड़ रहा है।
- अजीत शर्मा, स्थानीय।
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करीब ढाई वर्ष पूर्व पार्षद की जिम्मेदारी संभालने के बाद से ही यहां की गलियो, नालियों की साफ-सफाई और पेयजल किल्लत को दूर करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। अपने कार्यकाल के दौरान वार्ड में करीब 30 लाख का निर्माण भी कराया है। लेकिन, अब भी काफी स्थानों पर गलियों का निर्माण किए जाने की जरूरत है। साफ-सफाई की हालत ऐसी है कि पूरे वार्ड में नगर परिषद का कोई सफाई कर्मचारी तैनात नहीं है। नगर परिषद के आउटसोर्स किए सफाई कर्मचारी यहां केवल झाड़ू लगाकर चले जाते हैं। ऐसे में वार्ड के सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी अक्सर बढ़ जाती है। हालांकि, समय-समय पर इसकी सफाई कराई जाती है। वार्ड में व्याप्त पेयजल संकट का समाधान करने के लिए दर्जनों बार विभाग के अधिकारियों से बात की गई है, लेकिन उनका रवैया सकारात्मक नहीं है। जिला प्रशासन को इस ओर संज्ञान लेना चाहिए।
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- जोगिंदर पाल, पार्षद, वार्ड 17
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