पेयजल विभाग इस समय लाखों की बकाया राशि के नीचे दबा हुआ है। चौंकिए नहीं लाखों की बकाया राशि पेयजल विभाग को सरकार को नहीं देनी है। बल्कि विभाग और अन्य सरकारी विभागों से लाखों का बकाया बिल लेना है।
जिसके न मिलने के कारण विभाग आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। हां आंकड़ों की बात करें तो वर्तमान में पेयजल विभाग को 19 विभागों से बकाया बिल लेना है।
पिछले कुछ सालों से इन विभागों ने पेयजल विभाग द्वारा बार-बार बिल भेजने के बाद भी बिल चुकाए नहीं है। इस मामले में बनी सूची के अनुसार चिक्तिसा विभाग पर वित्तीय वर्ष 2014 में 10.74 लाख रुपये का बकाया था जो मार्च 2015 तक 15.21 लाख रुपये हो जाएगी और इससे विभाग शीर्ष पर है।
इसके बाद डिग्री कालेज कठुआ का नंबर आता है जिसके ऊपर 13 लाख रुपये से अधिक का बकाया है। बीएसएनएल को भी पेयजल विभाग का ग्यारह लाख रुपये का बिल जमा करवाना है।
बिजली विभाग भी इस मामले में रेस में है। विभाग को 9.08 लाख रुपये का बिल देना है। रावी-तवी विभाग के सिर पर भी 8.91 लाख रुपये का बिल बकाया है।
ऐसे ही अन्य भी कई विभाग हैं जिनके सिर पर लाखों रुपये का बिल बकाया है। ऐसे में पेयजल विभाग किस प्रकार इन बिलों की वसूली करेगा यह चिंता विभागीय अधिकारियों को सता रही है। इस संबंध में अधिकतर विभागों के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें समय पर बिल नहीं मिल पाता है।