- लोग बोले- रत्नुचक में सेना होती तो अब तक सन्याल में आतंकी हो चुके होते ढेर
- एक साल से खाली पड़े हैं शिविर
हीरानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) से सटे सन्याल गांव के साथ लगते जंगलों में आतंकियों से मुठभेड़ के बाद जारी तलाशी अभियान चौथे दिन भी जारी रहा। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को बारीकी से खंगाला, लेकिन कोई भी सफलता हाथ नहीं लगी है। इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।
आईबी के नजदीक बने सैन्य शिविर करीब एक साल से खाली पड़े हैं। यहां सेना की तैनाती की मांग ने जोर पकड़ लिया है। लोगों ने कहा कि अगर यहां सेना तैनात होती तो आतंकी घुसपैठ की सोचते भी नहीं और अगर करने में कामयाब होते भी तो सेना ने मौका रहते उन्हें ढेर कर दिया होता।
सन्याल के जिस इलाके में रविवार को आतंकियों से मुठभेड़ हुई, वहां से मात्र 250 से 300 मीटर की दूरी पर रतनुचक में एक साल से सेना का शिविर खाली पड़ा है। लोगों का कहना है कि जब सेना यहां थी तो आसपास के इलाकों में लगातार गश्त करती थी। इसी तरह मनियारी और बनियाडी में शिविरों में सेना तैनात थी, आईबी से लगते पूरे इलाके में हर गतिविधि पर नजर रहती थी। लोगों का कहना है कि जब से यह शिविर खाली हुए हैं आतंकी गतिविधियों में तेजी आई है, इसलिए जल्द यहां सेना को तैनात किया जाना चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ता राकेश चौधरी ने बताया कि एक साल पहले इन शिविरों से सेना को हटाया गया था। यहां फिर से उनकी तैनाती की मांग को लेकर कई बार प्रशासनिक अधिकारियों से बात की। इलाके का एक प्रतिनिधिमंडल सेना की गुर्ज डिवीजन के अधिकारियों से भी मिला था। इसके बावजूद यह शिविर खाली पड़े हैं।
हीरानगर डेवलपमेंट फोरम के अध्यक्ष धीरज गुप्ता ने कहा कि ऐसा नहीं है कि अन्य सुरक्षाबल उनकी तलाश नहीं कर रहे हैं या उन्हें ढेर करने में सक्षम नहीं है, लेकिन सेना की स्ट्रेटजी अन्य सुरक्षाबलों से अलग है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए खाली पड़े कैंपों में सेना को तैनात किया जाना चाहिए। संवाद