हीरानगर। ओल्ड सांबा-कठुआ (ओएसके) सड़क से सटे सीमावर्ती गांवों के लोगों ने इस रूट पर जम्मू-कठुआ के लिए यात्री बसों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि पहले यहां दो बसें चलाई जाती थीं लेकिन छह महीने से सिर्फ एक बस चल रही है। इस कारण लोग सार्वजनिक परिवहन सेवा से वंचित हो रहे हैं।
यात्रियों ने बताया कि लोगों की मांग पर करीब पांच वर्ष पहले इस रूट पर बस सेवा शुरू की गई थी, जिसका लाभ कई सीमावर्ती लोगों को मिला। जम्मू या कठुआ जाने के लिए लोगों के समय और किराये की भी बचत हुई।
इस कारण यहां चलने वाली बसों में यात्रियों की संख्या बढ़ी तो इस रूट पर दो बसों का संचालन शुरू किया गया लेकिन बसों की संख्या बढ़ाने की बजाय पिछले छह महीना से अधिक समय से एक ही बस सुबह और शाम चल रही है जिससे लोगों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
लोगों का कहना है कि एक बस इस रूट पर नाकाफी है। इसलिए यहां बसों की संख्या बढ़ाई जाकर सुबह से शाम तक लगातार बसों की आवाजाही होनी चाहिए।
स्थानीय निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि एक ही बस सुबह जम्मू की तरफ जाती है तो वही शाम को कठुआ की तरफ। इसके बीच अगर किसी को जम्मू या कठुआ जाना है तो उसे पहले हाईवे तक का 10 किलोमीटर तक का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है।
उन्होंने कहा पहले दो बसे इस रूट पर चलती थी, अब एक ही चल रही है जिसमें भारी भीड़ रहती है। इसलिए संबंधित विभाग और प्रशासन को इस रूट पर बसों की संख्या बढ़ानी चाहिए। कुलदीप राज ने कहा कि इस रूट पर बस सेवा का सबसे अधिक लाभ सीमावर्ती लोगों को हुआ था।
उन्होंने कहा कि इस रूट पर सरकारी बसों की संख्या बढ़नी चाहिए ताकि महिलाओं को मुफ्त यात्रा योजना का लाभ मिल सके।
इस रूट पर सरकारी बसों की संख्या बढ़ाना आरटीसी का काम है, लेकिन लिखित मांग मिलने पर निजी बस सेवा शुरू कर दी जाएगी। पहले भी इस रूट पर निजी बसें चलाई गई थी लेकिन ट्रांसपोर्टर का कहना था कि पर्याप्त सवारी न होने के कारण उन्हें घाटा रहा, जिसके बाद उन्होंने बस बंद कर दी। फिर भी हमारा प्रयास रहेगा कि लोगों की समस्या हल की जाए। - सुरिंदर पाल शर्मा, आरटीओ।