बर्फ से ढके दौला गांव के मध्य में दिखता मंदिर का खूबसूरत नजारा। संवाद
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कठुआ। डेढ़ महीने के लंबे इंतजार के बाद दौला गांव में चंडी माता का दरबार दर्शनों के लिए खुल गया है। माता के खजाने और त्रिशूल को पौराणिक परंपरा के अनुसार भकौगा गांव में ले जाया गया था। दुलंगल गांव के लोगों ने माघ माह में मंदिर के कपाट को खुलवाने की परंपरा को निभाया। बर्फ से लदे पहाड़ों पर मैया के जयघोष के बीच दुलंगल से आए भक्तों ने माता के दरबार को खोला। रात भर जागरण किया गया। जिसके बाद भक्तों को लंगर भी परोसा गया।
मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन गौरी शंकर संजान ने बताया कि पौराणिक परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट मार्गशीष माह में बंद होकर माघ माह में खुलते हैं। बताया कि मंदिर निर्माण करने वाले पुजारी मार्गशीष माह में माता के खजाने, त्रिशूल आदि को अपने साथ भकौगा ले जाया करते थे, यही प्रथा अभी भी निभाई जाती है। बताया कि दरबार खुल गया है लेकिन भकौगा से मैया कर पहला त्रिशूल चैत्र के पांचवें नवरात्र को दौला पहुंचेगा। इसे मेला पंचमी कहा जाता है और अगले दिन त्रिशूल वापस लौटता है। प्रथा के अनुसार पंचमी के बाद आने वाले मंगलवार को मैया का पूरा खजाना दौला गांव में वापस लाया जाता है। ज्ञात रहे कि डुग्गन के पहाड़ों पर दौला गांव में बसी मां चंडी का यह प्रसिद्ध मंदिर जिले के ऐतिहासिक मंदिरों में से एक है। दुर्गम और सड़क संपर्क से वंचित होने के बावजूद हर साल लाखों की संख्या में लोग यहां दर्शनों के लिए पहुंचते हैं।