कठुआ। गांव चनग्रां में श्रीमद्भागवत कथा में मंगलवार प्रवचन करते हुए कथा व्यास सुभाष शास्त्री ने कलयुग के बढ़ते प्रभाव में मोक्ष प्राप्ति के लिए सनातन परंपराओं का अनुसरण करने की सीख दी। कहा कि कलयुग के बढ़ते प्रभाव में धर्म को ग्रस लिया है। हमारे सद्ग्रंथ लुप्त हो गए हैं। दंभियों ने अपनी बुद्धि से कल्पना कर बहुत से पंथ प्रकट कर दिए हैं। इसके चलते मानव सत्य से दूर हो गया है।
उन्होंने कहा कि कलयुग के प्रभाव के कारण ही माता-पिता भी अपने बच्चों को उसी धर्म का ज्ञान देते हैं। इससे केवल सांसारिक साधन एकत्रित किए जा सकते हैं। बालकों को अच्छे संस्कार और अपने धर्म की शिक्षा भी देनी चाहिए। क्योंकि हमेशा रहने वाला धर्म सनातन ही है, जो कभी ना बदल सकता है, और न खत्म हो सकता है। यदि कोई इस स्वरूप को बदलने का प्रयास करेगा तो मनुष्य मनुष्य ना रहकर कुछ और हो जाएगा। क्योंकि जब किसी वस्तु का सनातन धर्म जो कि उस वस्तु की पहचान हो हटा दिया जाए। तब वह वस्तु नहीं रह जाती है। धर्म के बिना धर्मी की सत्ता नहीं रह जाती है। इसलिए हमें चाहिए कि हम स्वयं भी अपने बच्चों को सनातन धर्म का अनुसरण करने के लिए प्रेरित करें।
शास्त्री जी ने कहा कि अपने धर्म का पालन करते हुए मृत्यु को प्राप्त करना भी कल्याण कारक है, जबकि दूसरे का धर्म भय देने वाला है। इस प्रकार एक पतिव्रता स्त्री अपने पति को ही सर्वस्व मानकर उसका ही चिंतन करती है। उसी प्रकार हमें भी परमेश्वर को सर्वोच्च मानकर उसी का चिंतन और मनन करना चाहिए। परमेश्वर की आज्ञा के अनुसार मन, वाणी और शरीर से स्वाभाविक कर्तव्य और आचरण ही सच्चा परमेश्वर की पूजन है। यही सनातन धर्म का अनुसरण एवं अनुपालन है। इसका फल हमेशा सुख शांति और अंतत: मोक्ष की प्राप्ति है।