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पहले सूखे की मार, अब बीमारियों ने किया वार

Sat, 27 Sep 2014 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
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कठुआ। खरीफ का यह सीजन किसानों को नागवार गुजर रहा है। पर्वतीय इलाकों में जहां मक्की की फसल की व्यापक बर्बादी हुई तो मैदानी इलाकों में किसानों की रीढ़ कही जाने वाली धान की फसल चिंता का सबब बन गई है।
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शुरुआती दौर में धान की फसल को सूखे जैसे हालात से जूझना पड़ा, वहीं आखिरी पड़ाव में बीमारियों ने घेर लिया है। खासकर बासमती की फसल व्यापक स्तर पर बीमारियों की चपेट में है। ऐसे में नफे की उम्मीद लगाए किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

कठुआ जिले के निचले मैदानी इलाकों में खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान है। बाजार मूल्य और नफे की संभावनाओं को देखते हुए हाल के वर्षों में किसानों का रुझान मोटे धान से बासमती की उन्नत किस्मों की तरफ बढ़ा है। वर्तमान सीजन में तो बड़े स्तर पर किसानों ने बासमती की उन्नत किस्में खेतों में लगाई हैं, लेकिन मौसम और बीमारियों की मार ने उम्मीदों को झकझोर दिया है।
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दरअसल, बासमती की उन्नत किस्मों में शुमार पूसा 1121 और पूसा 1509 की बाजार में अच्छी खासी मांग रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मैदानी इलाकों के किसानों ने दोनों किस्मों को अपनाते हुए इस वर्ष खेती की है। लेकिन उम्मीदों के विपरीत मानसून सीजन की शुरुआत में फसल को सूखा झेलना पड़ा। इससे पौधों की सेहत पर असर पड़ा। वहीं, पुष्प अवस्था में पहुंचने पर पौधों को फफूंद ने चपेट में ले लिया।

पिछले दो सप्ताह से किसान फफूंद से निपटने में लगे हुए हैं, लेकिन बीमारी का असर कई इलाकों में अब भी प्रभावी है। किसान जोगिंदर सिंह, मोहन और प्रभु कुमार ने बताया कि उन्होंने अधिकांश भूमि पर बासमती लगाई है। ज्यादातर फसल बीमारी की चपेट में है, जिससे वह खासे चिंतित हैं।

कृषि विज्ञान केंद्र की एग्रोमेट यूनिट प्रभारी और एसएमएस एग्रोनॉमी डॉक्टर अरविंद प्रकाश सिंह ने बताया कि धान को शुरुआती चरण में सिंचाई के पानी और उमस भरे माहौल की जरूरत पड़ती है। लेकिन मानसून का यह चरण सूखा रहा। इससे पौधे कमजोर हो गए।

बाद के चरण में जरूरत से ज्यादा उमस और सिंचाई का पानी मिलने की वजह से बीमारियों का न्योता मिला। हालांकि, उन्होंने किसानों को जागरूक कर समय रहते दवाओं के छिड़काव की सलाह दी गई है। लेकिन फिर भी बासमती की फसल की उपज प्रभावित होने के आसार बन गए हैं।
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